Bitter gourd : करेला किसी के लिए कड़वाहट तो किसी के किसी के लिए स्वाद का जादू बन जाता है। आयुर्वेद तो करेले को घर का डॉक्टर मानता है। ज्यादातर लोग करेले का नाम सुनते ही नाक-भौं चढ़ा लेते हैं। अपनी बेहतरीन औषधीय विशेषताओं (medicinal properties) के कारण एक अत्यंत स्वास्थ्यवर्धक सब्जी है। यह मधुमेह (diabetes) प्रबंधन में, रक्त शोधन (blood purification) में, पाचन तंत्र सुधारने में, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में और त्वचा के विकारों के इलाज में अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
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मधुमेह में कारगर: करेले में “पौधा-इंसुलिन” (plant-insulin) नामक एक पॉलीपेप्टाइड होता है, जो रक्त शर्करा (blood sugar) के स्तर को कम करने में सहायता करता है।
पाचन में सहायक: यह कब्ज, पेट के कीड़े और पेट के अल्सर (stomach ulcers) जैसी समस्याओं के इलाज में फायदेमंद है, क्योंकि यह फाइबर से भरपूर होता है।
रक्त और लीवर की शुद्धि: करेले का रस लीवर की कार्यक्षमता बढ़ाता है और रक्त को शुद्ध करता है, जिससे त्वचा संबंधी समस्याएं ठीक होती हैं।
रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity): इसमें विटामिन C, जिंक और आयरन की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करता है।
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त्वचा और आंखों के लिए: इसमें मौजूद बीटा-कैरोटीन और अन्य यौगिक आंखों के विकार दूर करने और त्वचा को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं।