आजकल बाज़ार में तरह-तरह के केमिकल युक्त शैम्पू और हेयर केयर प्रोडक्ट्स मौजूद हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया को बाल धोने और शैम्पू का कॉन्सेप्ट सबसे पहले भारत ने ही दिया था? 'शैम्पू' शब्द असल में संस्कृत के 'चंपति' (Champati) शब्द से निकला है, जिसका अर्थ होता है मालिश करना ।
नई दिल्ली। आजकल बाज़ार में तरह-तरह के केमिकल युक्त शैम्पू और हेयर केयर प्रोडक्ट्स मौजूद हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया को बाल धोने और शैम्पू का कॉन्सेप्ट सबसे पहले भारत ने ही दिया था? ‘शैम्पू’ शब्द असल में संस्कृत के ‘चंपति’ (Champati) शब्द से निकला है, जिसका अर्थ होता है मालिश करना । पुराने समय में भारत में बालों को साफ करने और उनकी देखभाल करने के लिए किसी केमिकल का नहीं, बल्कि पूरी तरह से आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चीज़ों का इस्तेमाल किया जाता था।
आयुर्वेद में बालों की देखभाल का रहस्य
भारतीय आयुर्वेदिक संस्कृति में शरीर और बालों की देखभाल को केवल सुंदरता से नहीं, बल्कि सेहत और मानसिक शांति से जोड़कर देखा गया है। सदियों से हमारे देश के घरों में बाल धोने के लिए प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का उपयोग होता आ रहा है।
रीठा (Soapnut) इसमें प्राकृतिक झाग (Saponin) होता है, जो बालों से धूल और गंदगी को बिना नुकसान पहुंचाए साफ करता है।
शिककाई (Shikakai) इसे ‘बालों का फल’ भी कहा जाता है। यह एक बेहतरीन नेचुरल कंडीशनर है जो बालों को मुलायम और चमकदार बनाता है।
आंवला (Amla) विटामिन सी से भरपूर आंवला बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है, बालों का झड़ना रोकता है और उन्हें समय से पहले सफेद होने से बचाता है।
भृंगराज और मेथी: बालों की ग्रोथ और रूसी (Dandruff) की समस्या को दूर करने के लिए आयुर्वेद में इनका इस्तेमाल किया जाता था।
कैसे बनता था पारंपरिक आयुर्वेदिक शैम्पू?

पुराने ज़माने में लोग इन जड़ी-बूटियों को सुखाकर उनका पाउडर बना लेते थे या फिर रीठा, शिककाई और आंवला को रात भर पानी में भिगोकर रखते थे। सुबह इस पानी को उबालकर, छानकर बालों में लगाया जाता था। यह तरीका न केवल बालों को पूरी गहराई से साफ करता था, बल्कि खोपड़ी (Scalp) को भी ठंडा और स्वस्थ रखता था।
पश्चिमी दुनिया तक कैसे पहुंचा यह विचार?
18वीं शताब्दी में जब ब्रिटिश व्यापारी भारत आए, तो उन्होंने यहां की ‘चंपी’ (सिर की मालिश) और प्राकृतिक हर्बल पेस्ट से बाल धोने की परंपरा को देखा कि राजवंश की महिलाएं और रानियां बालों की सुंदरता बढ़ाने के लिए रीठा और आंवला जैसी कई तरह की जड़ीबूटियों का इस्तेमाल किया करती थीं। लेकिन जब अंग्रेज भारत आए तो उन्होंने देखा कि यहां ऊंचे घरानों में बालों को सुंदर बनाए रखने के लिए किसी तरह के विशेष पेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है। फिर क्या था, अंग्रेज इस पेस्ट को ब्रिटेन ले गए, जहां यह शब्द बदलकर ‘Shampoo’ हो गया। बाद में इसे बोतलों में बंद करके तरल (Liquid) रूप में बेचा जाने लगा।
आज पूरी दुनिया एक बार फिर से केमिकल-फ्री और हर्बल चीज़ों की तरफ लौट रही है। हमारे भारतीय आयुर्वेद की यह परंपरा इस बात का सबूत है कि हमारी प्राचीन संस्कृति कितनी समृद्ध और विज्ञान पर आधारित थी। प्राकृतिक चीज़ों से बने ये नुस्खे आज भी बालों की सेहत के लिए सबसे उत्तम माने जाते हैं।
रिपोर्ट: दीपांजली मिश्रा