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भारत का ये है बेहद अनोखा और रहस्यमयी देवी मंदिर, जहां पुरुष साड़ी पहनकर और 16 श्रृंगार धारणकर देवी मां से मांगते हैं मन्नत

Mysterious Temple :  क्या आपने कभी किसी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है? जहां माता के दर्शन के लिए पुरुषों को साड़ी पहननी पड़ती है और साथ ही 16 श्रृंगार भी करना पड़ता है। आखिर क्यों पुरुष महिलाओं का रूप धारण करते हैं? क्या है इसके पीछे की रहस्यमयी कहानी, आइए जानते हैं।

By santosh singh 
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Mysterious Temple :  क्या आपने कभी किसी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है? जहां माता के दर्शन के लिए पुरुषों को साड़ी पहननी पड़ती है और साथ ही 16 श्रृंगार भी करना पड़ता है। आखिर क्यों पुरुष महिलाओं का रूप धारण करते हैं? क्या है इसके पीछे की रहस्यमयी कहानी, आइए जानते हैं।

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भारत में एक ऐसा मंदिर है, जहां देवी के दर्शन करने के लिए पुरुषो को साड़ी पहनने की परंपरा सदियों से निभाई जा रही है। यह अनोखा मंदिर है केरल के कोल्लम जिले (Kollam District) में स्थित कोट्टनकुलंगरा देवी मंदिर (Kottankulangara Devi Temple)। यहां हर साल चामयाविलक्कु नाम का भव्य उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान हजारों पुरुष साड़ी पहनते हैं, गहने पहनते हैं, चेहरे पर मेकअप करते हैं, बालों में गजरा लगाते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ देवी मां की आराधना करते हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस उत्सव के दौरान मंदिर के बाहर मेकअप आर्टिस्ट और ब्यूटी पार्लर की अस्थायी दुकानें भी सज जाती हैं, जहां पुरुष पारंपरिक महिला वेशभूषा में तैयार होते हैं। शाम होते ही जब हजारों श्रद्धालु हाथों में दीप लेकर मंदिर परिसर में पहुंचते हैं तो पूरा वातावरण रोशनी और भक्ति से जगमगा उठता है।

जानें कहां से शुरू हुई यह अनोखी परंपरा?

मान्यता है कि सदियों पहले कुछ चरवाहे लड़के खेल-खेल में लड़कियों का वेश धारण कर यहां पूजा किया करते थे। तभी एक बार उनकी सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होकर देवी मां ने उन्हें दर्शन दिए और उन्हें आशीर्वाद दिया। तभी से विश्वास है कि जो भी पुरुष सच्चे मन से महिला का रूप धारण कर यहां पूजा करता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है।

इस उत्सव में शामिल होने के लिए किसी जाति, धर्म या उम्र की बाध्यता नहीं मानी जाती। कई श्रद्धालु हर साल अपनी किसी मन्नत के पूरी होने पर दोबारा यहां आते हैं। यही वजह है कि यह उत्सव सिर्फ धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक माना जाता है। भारत की संस्कृति और परंपराएं जितनी विविध हैं उतनी ही अद्भुत भी हैं ।

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रिपोर्ट: कल्पना पांडेय

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