लखनऊ। कूड़ा निस्तारण के नाम पर करोड़ों का फर्जीवाड़ा करने वाली Ecostan Infra Private Limited कंपनी पर उत्तर प्रदेश का नगर विकास विभाग मेहरबान है। कंपनी को टेंडर देने के लिए सभी नियमों को दरकिनार कर दिया गया। यही नहीं, Ecostan Infra Private Limited कंपनी की लगातार शिकायत भी जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंची है। इसके बाद भी अधिकारियों ने आंख और कान दोनों बंदकर सरकारी राजस्व को करोड़ों का नुकसान करने वाली कंपनी को टेंडर दे दिया।
पढ़ें :- Tamil Nadu Election 2026 : मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी पर साधा निशाना, बोले- 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल क्यों नहीं लागू किया?
दरअसल, कानपुर में Legacy waste tendar में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है और ये सब फर्जीवाड़ा Ecostan Infra Private Limited कंपनी को टेंडर देने के लिए किया गया है। दरअसल, कानपुर में Legacy waste tendar में तीन निविदा प्राप्त हुई थी, जिसमें मै. पूजा कंस्ट्रक्शन, मैं. साईं सर्विस और Ecostan Infra Private Limited शामिल थी। इसमें पूजा कंस्ट्रक्शन ओर साईं सर्विस कंपनी की तरफ से न तो FDR लगाई गई और न ही RTGs किया गया। लिहाजा, आसानी से Ecostan Infra Private Limited को इसका टेंडर हासिल हो गया।
सबसे अहम बात ये है कि, फर्जीवाड़ा करने वाली इस कंपनी की एक के बाद एक कई शिकायतें हुईं हैं इसके बाद भी उत्तर प्रदेश नगर विकास विभाग के अधिकारियों ने इसे टेंडर देने में रूचि दिखाई। सूत्रों की माने तो इसके पीछे अधिकारियों और उनके कुछ करीबियों तक कंपनी की तरफ से मोटी रकम पहुंचाई जाती है, जिसके कारण Ecostan Infra Private Limited अपने सभी काम को आसनी से कर लेता है।
पढ़ें :- अभिनेता पवन क्लयाण के सेहत को लेकर चिरंजीवी ने सोशल मीडिया पर दिया अपडेट, पीएम ने लिया हालचाल
RDF के नाम पर भी कर रही खेल
Ecostan Infra Private Limited कंपनी RDF (अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन) के नाम पर भी बड़ा खेल करती है। NGT के नियमों का ताख पर रखकर कंपनी काम करती है। एक टन के कूड़ा प्रोसेसिंग में करीब 25 से 30 प्रतिशत RDF निकलता है लेकिन कंपनी महज इसे 6 से 8 प्रतिशत के बीच ही दिखाती है। कानपुर ही नहीं, प्रयागराज में भी इस कंपनी ने ऐसा ही किया है। इनके पास कूड़े की प्रोसेसिंग का कोई सही आंकड़ा नहीं है। इससे साफ है कि, Ecostan कूड़ा निस्तारण की बजाए उसे गंगा नदी और गड्ढों में फेंक देती है। इसकी कई तस्वीरें और वीडियो भी सामने आ चुके हैं लेकिन उत्तर प्रदेश नगर विकास के प्रमुख सचिव से लेकर विभाग के कई अधिकारी कंपनी पर अपनी मेहरबानी बनाए हुए हैं।