Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. देश
  3. थलपति विजय की ‘जन नायकन’ को सेंसर सर्टिफिकेट न मिलने पर मचा बवाल, कांग्रेस ने बताया तमिल फ़िल्म इंडस्ट्री पर हमला

थलपति विजय की ‘जन नायकन’ को सेंसर सर्टिफिकेट न मिलने पर मचा बवाल, कांग्रेस ने बताया तमिल फ़िल्म इंडस्ट्री पर हमला

By Abhimanyu 
Updated Date

Jana Nayagan Postponed: थलपति विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ (Jana Nayagan) को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से सेंसर सर्टिफिकेट मिलने में देरी के कारण रिलीज़ से दो दिन पहले पोस्टपोन करना पड़ा है। जिसके बाद केवीएन प्रॉडक्शन ने अपने दर्शकों और स्टेकहोल्डर्स से धैर्य रखने की अपील की है। इस बीच, कांग्रेस ने इसे तमिल फ़िल्म इंडस्ट्री पर हमला बताया है।

पढ़ें :- विजय की फिल्म 'जन नायकन' के मेकर्स को लगा झटका, याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म ‘जन नायकन’ को CBFC से मंज़ूरी मिले बिना भी, कुछ भारतीय सिनेमाघरों और इंटरनेशनल मार्केट में टिकट बुकिंग शुरू कर दी गई थी। आखिरी समय में कैंसल होने से, विजय की इस फिल्म को कथित तौर पर लगभग 50 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। जिसको लेकर केवीएन प्रॉडक्शन ने एक बयान जारी कर कहा- बहुत भारी मन से हम अपने सभी स्टेकहोल्डर्स और दर्शकों के साथ यह अपडेट शेयर कर रहे हैं। 9 जनवरी को रिलीज़ होने वाली, जिसका बेसब्री से इंतज़ार किया जा रहा था, फ़िल्म ‘जना नायकन’ को कुछ ऐसे कारणों से टाल दिया गया है, जिन पर हमारा कोई कंट्रोल नहीं है।”

प्रॉडक्शन ने आगे कहा- “हम इस फ़िल्म को लेकर आपकी उम्मीदों, उत्साह और भावनाओं को अच्छी तरह समझते हैं, और यह फ़ैसला हममें से किसी के लिए भी आसान नहीं था। नई रिलीज़ डेट जल्द ही घोषित की जाएगी। तब तक, हम आपसे विनम्र निवेदन करते हैं कि आप धैर्य रखें और अपना प्यार बनाए रखें। आपका अटूट समर्थन हमारी सबसे बड़ी ताकत है और पूरी ‘जना नायकन’ टीम के लिए सब कुछ है।”

कांग्रेस सांसद ने केंद्र सरकार पर बोला हमला

कांग्रेस सांसद ज्योतिमणि ने एक्स पोस्ट में लिखा, “केंद्र सरकार के सेंसरशिप बोर्ड द्वारा फ़िल्म *जन नायकन* को सर्टिफिकेट देने से इनकार करना सबसे कड़ी निंदा के लायक है। यह तमिल फ़िल्म इंडस्ट्री पर हमला है। हमारी राजनीतिक जुड़ाव, पसंद और नापसंद से परे, हर उस व्यक्ति को जो अभिव्यक्ति की आज़ादी में विश्वास रखता है, इसकी निंदा करनी चाहिए। एक फ़िल्म सैकड़ों लोगों की कड़ी मेहनत से बनती है, जिसमें कई करोड़ रुपये का निवेश होता है।”

पढ़ें :- मेरे घर आ जाना, विला नंबर…’, प्रभास की फिल्म The Raja Saab के डायरेक्टर ने क्यों कही ये बात?

ज्योतिमणि ने लिखा, “इस तरह से इसे दबाने की कोशिश करना रचनात्मक आज़ादी के बिल्कुल खिलाफ है। और राजनीतिक कारणों से इसे दबाना और भी खतरनाक है। प्रवर्तन निदेशालय, CBI और आयकर विभाग के बाद, सेंसरशिप बोर्ड अब मोदी सरकार का राजनीतिक हथियार बन गया है। हम इस पर चुपचाप दर्शक बनकर नहीं रह सकते। मैं कुछ सालों तक सेंसरशिप कमेटी का सदस्य रहा हूँ। मैं इसके कामकाज से अच्छी तरह वाकिफ हूँ। मेरे विचार से, इस तकनीकी युग में, सेंसरशिप बोर्ड एक पुराना संस्थान है। किसी फ़िल्म को स्वीकार करना है या अस्वीकार करना है, यह लोगों के हाथ में है।”

उन्होंने लिखा, “भले ही हम फ़िल्मों को सेंसर करते रहें, हज़ारों अनसेंसर्ड वीडियो और सीन टेलीविज़न, YouTube और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर फैल रहे हैं। अरबों लोग उन्हें देखते हैं। इस संदर्भ में, सिर्फ़ फ़िल्मों को सेंसर करने से कोई असली बदलाव नहीं आएगा – यह कड़वी सच्चाई है। महिलाओं को अश्लील तरीके से दिखाना या उनके बारे में बात करना, या डबल मीनिंग वाली बातें करना, सेंसरशिप गाइडलाइंस के अनुसार गलत है। हालांकि, ऐसी चीज़ों के बिना बनने वाली फ़िल्में बहुत कम हैं। सेंसरशिप बोर्ड शायद ही कभी ऐसे मामलों पर ध्यान देता है और उनके लिए सर्टिफिकेट देने से इनकार नहीं करता – यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए। इसलिए, सेंसरशिप बोर्ड में सुधार होना चाहिए। तब तक, हमें इसे राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का कड़ा विरोध करना चाहिए।”

पढ़ें :- फिल्म ‘जन नायकन’ के एक्टर थलापति विजय, बोले-जीवन में सफल होने के लिए दोस्त नहीं, एक शक्तिशाली दुश्मन की होती है जरूरत

तमिलनाडु और पुडुचेरी के कांग्रेस प्रभारी गिरीश चोडनकर ने एक्स पोस्ट में लिखा, “प्रिय पीएमओ (@PMOIndia) नरेंद्र मोदी (@narendramodi) जी, एक्टर विजय की फिल्म ‘जना नायकन’ को लेकर चल रहे विवाद ने राजनीतिक ताकत के गलत इस्तेमाल को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालांकि राजनीतिक असहमति समझ में आती है, लेकिन किसी कलाकार के काम को निशाना बनाना गलत है।”

उन्होंने आगे लिखा, “तमिलनाडु के लोग राजनीतिक फायदे के लिए सिनेमा पर सेंसरशिप बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम आपसे आग्रह करते हैं कि आप यह सुनिश्चित करें कि कला और मनोरंजन को राजनीतिक लड़ाइयों में मोहरे के तौर पर इस्तेमाल न किया जाए। अधिकारियों पर आपके दबाव के कारण विजय की फिल्म में देरी हो रही है, जो प्रोड्यूसर्स और फैंस के साथ गलत है। आइए कला से राजनीति को दूर रखें और रचनात्मक स्वतंत्रता का सम्मान करें। मोदी जी, एक्टर विजय पर नहीं, बल्कि पॉलिटिशियन विजय पर कार्रवाई करके अपने 56 इंच के सीने वाले दावे को साबित करें। याद रखें, आपकी डराने-धमकाने वाली राजनीति तमिलनाडु में काम नहीं करेगी।”

Advertisement