Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. देश
  3. इस्तीफे के बाद पहली बार बोले धर्मेंद्र प्रधान, ‘Gen Z को कुछ लोगों ने गुमराह किया’; NEET विवाद पर खुलकर रखी बात

इस्तीफे के बाद पहली बार बोले धर्मेंद्र प्रधान, ‘Gen Z को कुछ लोगों ने गुमराह किया’; NEET विवाद पर खुलकर रखी बात

By Harsh 
Updated Date

Dharmendra Pradhan: NEET-UG परीक्षा विवाद के बीच शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार पूरे मामले पर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने Gen Z यानी नई पीढ़ी के छात्रों को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि उन्हें महसूस हुआ कि कुछ लोग बच्चों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधान ने साफ किया कि उनका इस्तीफा व्यक्तिगत प्रतिष्ठा या पद की लड़ाई नहीं था, बल्कि उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि छात्रों की वास्तविक चिंताओं का राजनीतिक इस्तेमाल न हो। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वह Gen Z को अपने बच्चों की तरह मानते हैं। NEET विवाद और छात्रों के आंदोलन के दौरान घटनाक्रम जिस तरह आगे बढ़ा, उससे उन्हें लगा कि नई पीढ़ी को सही दिशा देने के बजाय कुछ लोग उन्हें गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में वह खुद को Gen Z का ‘victim’ मानते हैं।

पढ़ें :- RG Kar Case में नया मोड़! नई CBI टीम, परिवार की बढ़ी उम्मीद और ‘अभया मेमोरियल ट्रस्ट’ की एंट्री

इस्तीफे के बाद अपनी पहली सार्वजनिक टिप्पणी में प्रधान ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने Gen Z की आकांक्षाओं और छात्रों की चिंताओं को लेकर प्रधानमंत्री से चर्चा की। प्रधान के मुताबिक, उन्होंने पीएम मोदी से आग्रह किया कि नई पीढ़ी की भावनाओं को समझा जाए और उनकी बात को गंभीरता से लिया जाए।प्रधान ने कहा कि उनके लिए मंत्री पद या व्यक्तिगत प्रतिष्ठा सबसे महत्वपूर्ण नहीं है। जब लाखों छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में भरोसे का सवाल हो तो व्यक्तिगत सम्मान पीछे रह जाता है। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते थे कि छात्रों की परेशानी किसी राजनीतिक उद्देश्य का साधन बने।

NEET विवाद के दौरान धर्मेंद्र प्रधान विपक्ष के निशाने पर रहे थे। परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार और तत्कालीन शिक्षा मंत्री पर सवाल उठाए थे। प्रधान ने इसका जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी जिम्मेदारी से पीछे हटने की कोशिश नहीं की। उनके मुताबिक, विवाद सामने आने के बाद से ही उन्होंने मामले की जिम्मेदारी स्वीकार की और स्थिति को संभालने के लिए जरूरी कदम उठाए।उन्होंने कहा कि परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं की जानकारी सामने आने के बाद जांच एजेंसियों को मामले की जांच सौंपी गई। प्रधान के अनुसार, सरकार का मुख्य उद्देश्य उन छात्रों के हितों की रक्षा करना था, जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा की तैयारी की थी।

NEET जैसी परीक्षा लाखों युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। मेडिकल कॉलेज में दाखिले की तैयारी करने वाले छात्र कई वर्षों तक मेहनत करते हैं। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की गड़बड़ी का असर सिर्फ परिणाम पर नहीं पड़ता, बल्कि छात्रों और उनके परिवारों के भरोसे पर भी पड़ता है। प्रधान ने इसी भरोसे को बनाए रखने को महत्वपूर्ण बताया।धर्मेंद्र प्रधान ने भारत की युवा आबादी का जिक्र करते हुए कहा कि देश में हर साल करीब दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। आने वाले वर्षों में यही युवा भारत की अर्थव्यवस्था और विकास की दिशा तय करेंगे। इसलिए Gen Z की चिंताओं और आकांक्षाओं को समझना देश के भविष्य के लिए जरूरी है।ओडिशा को लेकर लगाए गए राजनीतिक आरोपों पर भी प्रधान ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे उनके राज्य की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचे। उनका कहना था कि वह ओडिशा की छवि खराब करने वाला कोई कदम नहीं उठा सकते।प्रधान के बयान के बाद NEET विवाद पर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो सकती है। विपक्ष परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और सरकार की जवाबदेही को लेकर सवाल उठाता रहा है, जबकि प्रधान का कहना है कि उन्होंने पूरे मामले में अपनी जिम्मेदारी निभाई।

उनके इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय का नेतृत्व बदल चुका है, लेकिन NEET विवाद से जुड़े सवाल अभी भी बने हुए हैं। परीक्षा में पारदर्शिता, पेपर सुरक्षा, छात्रों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही जैसे मुद्दे भविष्य के लिए बेहद अहम हैं।धर्मेंद्र प्रधान के बयान से इतना जरूर साफ है कि वह अपने इस्तीफे को व्यक्तिगत हार के रूप में नहीं देखते। उन्होंने इसे छात्रों के हित और शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बनाए रखने से जोड़ते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की है। अब देखना होगा कि उनके बयान पर छात्र संगठनों और विपक्ष की क्या प्रतिक्रिया आती है और NEET विवाद से जुड़े बाकी सवालों का समाधान किस तरह होता है।

पढ़ें :- बिहार के छात्रों के लिए सीएम सम्राट चौधरी की 4 बड़ी घोषणाएं, शिक्षा-परीक्षा व्यवस्था में होंगे बदलाव
Advertisement