Dharmik Mahatva 108 Ank : सनातन धर्म में 108 संख्या का विशेष महत्व है। प्रभु को नाम जपने से लेकर यज्ञ में आहुति देने तक और गले में पवित्र माला धारण करने में इस चमत्कारी सख्या का विशेष् महत्व है। इसी कारण हिंदुओ के जप की सभी माला में 108 मनके ही होते हैं। खासकर रुद्राक्ष की माला में 108 मनके ही होते हैं। हिंदू धर्म के साथ साथ बौद्ध धर्म में भी 108 संख्या को विशेष शुभ माना जाता है।
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माना जाता है कि एक स्वस्थ मनुष्य दिन में 21600 बार श्वास लेता है। इसका मतलब है हर 12 घंटे में 10800 श्वास। दिन का समय दैनिक कार्यों में व्यतीत होता है और शेष बचे समय में ध्यान करना चाहिए। लेकिन ऐसा संभव नहीं है इसलिए माला में 108 मनके बनाये गए है। जिससे हम आसानी से ध्यान करते हुए जप कर सके।
प्राचीन विज्ञान के अनुसार एक वर्ष में सूर्य 216000 कलाएं बदलता है। इसके साथ साथ वर्ष में दो बार सूर्य की स्थिति भी परिवर्तित होती है। इसका मतलब है कि हर 6 महीने में सूर्य 108000 कलाएं बदलता है। इसी सिद्धांत पर माला में 108 मनके निर्धारित किये गए. एक एक मनका सूर्य की कला का प्रतीक होता है ।
108 अंक भगवान शिव से भी जुड़ा हुआ है। जब भगवान शंकर अत्यंत क्रोध में होते हैं तब वे तांडव नृत्य करते हैं। तांडव अपने आप में एक अलौकिक नृत्य माना जाता है जिसमें 108 मुद्राएं होती हैं।
ज्योतिष के अनुसार ब्रह्माण्ड को 12 भागों में विभाजित किया गया है। इन्हें हम 12 राशियों के नाम से जानते है। इन 12 राशियों में ही 9 ग्रहों का विचरण होता है। अगर 12 राशियों और 9 ग्रहों को गुणा किया जाये तो हमें 108 का अंक प्राप्त होता है।
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इसी सिद्धांत पर माला में 108 मनके होते है जो नवग्रह और 12 राशियों को प्रदर्शित करते है।
ज्योतिष और अंतरिक्ष विज्ञान में नक्षत्रों की संख्या 27 बताई गयी है. वर्ष भर में हर एक नक्षत्र के 4 अलग अलग चरण होते है. इसका मतलब है कि 27 नक्षत्रों के कुल 108 चरण होते है। माना जाता है कि माला के 108 मनके इन 27 नक्षत्रों और उनके 4 चरणों का दर्शाते है।