Diwali 2026 : हनुमान चालीसा की प्रसिद्ध पंक्ति— “अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता” के अनुसार, भगवान हनुमान को माता सीता से आठ प्रकार की अलौकिक सिद्धियां प्राप्त थीं। दिवाली से ठीक एक दिन पहले (छोटी दिवाली, नरक चतुर्दशी या काली चौदस के दिन) भगवान हनुमान की पूजा की जाती है।
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हनुमान जी की अष्टसिद्धियों में छठी सिद्धि — प्रकाम्य
प्रकाम्य सिद्धि का अर्थ है—मन की इच्छा के अनुसार कार्य करने की अद्भुत क्षमता और संकल्प को सिद्ध करने की शक्ति।
हिंदू धर्मशास्त्रों में अष्टसिद्धियों का वर्णन मिलता है। इनमें प्रकाम्य सिद्धि को विशेष स्थान प्राप्त है।
प्रकाम्य सिद्धि का आध्यात्मिक अर्थ प्रकाम्य का आशय केवल इच्छा पूरी होने से नहीं है, बल्कि अपने संकल्प, आत्मबल और इच्छाशक्ति के माध्यम से असंभव प्रतीत होने वाले कार्य को संभव बनाने की क्षमता से है।
हनुमान जी के चरित्र में इसका भाव इस प्रकार दिखाई देता है—
अडिग संकल्प: प्रभु श्रीराम का कार्य पूरा करने का दृढ़ निश्चय।
इच्छाशक्ति: कठिन से कठिन परिस्थिति में भी लक्ष्य से विचलित न होना।
कार्यसिद्धि: समुद्र पार करके माता सीता की खोज करना।
आत्मबल: अपनी क्षमताओं को पहचानकर उनका सदुपयोग करना।
प्रकाम्य और प्राप्ति में अंतर
प्राप्ति सिद्धि: इच्छित वस्तु या स्थान तक पहुँचने अथवा उसे प्राप्त करने की क्षमता।
प्रकाम्य सिद्धि: इच्छानुसार कार्य या अनुभव को संभव बनाने की क्षमता।
आध्यात्मिक संदेश
हनुमान जी की प्रकाम्य सिद्धि हमें सिखाती है कि जब मन में पवित्र संकल्प, बुद्धि में विवेक और कर्म में समर्पण हो, तो कठिन से कठिन लक्ष्य की ओर भी आगे बढ़ा जा सकता है।
एक सुंदर विचार:
जहाँ संकल्प में श्रीराम हों, कर्म में हनुमान हों और हृदय में अटूट विश्वास हो, वहाँ असंभव भी संभव होने की प्रेरणा बन जाता है।