दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी का हिंदू धर्म में खास महत्व है। इसे छोटी दिवाली और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। नरक चतुर्दशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अत्याचारी राक्षस नरकासुर के वध से जुड़ा है।
Narak Chaturdashi 2026 : दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी का हिंदू धर्म में खास महत्व है। इसे छोटी दिवाली और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। नरक चतुर्दशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अत्याचारी राक्षस नरकासुर के वध से जुड़ा है। यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है और इसे छोटी दिवाली तथा रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध किया था और उसकी कैद से 16,100 कन्याओं को मुक्त कराया था। इस दिन व्रत, विशेष पूजा, रूप निखारने के लिए उबटन स्नान और यमराज के निमित्त दीपदान (यम दीपदान) करने का विशेष विधान है।
तिथि की शुरुआत: 7 नवंबर 2026 को सुबह 10:47 बजे से।
तिथि का समापन: 8 नवंबर 2026 को सुबह 11:27 बजे तक
एक अन्य कथा के अनुसार, भगवान वामन ने जब तीन पग में राजा बलि का सब कुछ नाप लिया, तब बलि की दानवीरता से प्रसन्न होकर उन्हें पाताल लोक का राजा बना दिया और वरदान दिया कि जो भी कार्तिक चतुर्दशी को यमराज के लिए दीपदान करेगा, उसे अकाल मृत्यु और नरक की यातनाओं से मुक्ति मिलेगी।
यम दीपदान
शाम के समय घर के सबसे बुजुर्ग सदस्य या मुखिया द्वारा यमराज के निमित्त एक बड़ा चार मुख वाला (चौमुखी) दीपक जलाया जाता है। इस दीपक में सरसों का तेल डालकर इसे घर के बाहर दक्षिण दिशा (यम की दिशा) की ओर मुख करके रखा जाता है। मान्यता है कि इससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।