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SIR में नाम कटा, पर नहीं मानी हार, सिर्फ 14 दिन के प्रचार में जीता चुनाव, कांंग्रेस उम्मीदवार मोताब शेख बोले-‘ मैं दुनिया के सबसे भाग्यशाली’ विधायक

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। कांग्रेस उम्मीदवार मोताब शेख (Congress Candidate Motab Sheikh) पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 (West Bengal Elections 2026) में SIR में नाम कटने के चलते अपने विधानसभा क्षेत्र फरक्का में सिर्फ 14 दिन ही प्रचार कर पाए। बता दें कि एक महीने पहले तक मोताब शेख (Motab Sheikh) पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मतदाता सूची में शामिल किए जाने की उम्मीद कर रहे थे। अब, 58 वर्षीय मोताब बंगाल के उन दो कांग्रेस उम्मीदवारों में शामिल हैं जिन्होंने राज्य में पार्टी को बचाकर रखा है। 2021 में कांग्रेस बंगाल में खाता भी नहीं खोल पाई थी।

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विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बाद हुए फैसले (Adjudication) में उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद शेख ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और ट्रिब्यूनलों से उनके मामले की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की मांग की। 5 अप्रैल को पहले चरण की सीटों के लिए नामांकन की आखिरी तारीख से एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने शेख के पक्ष में फैसला सुनाया।

8000 वोटों से ज्यादा के अंतर से जीत

6 अप्रैल को शेख ने फरक्का विधानसभा सीट (Farakka Assembly Constituency) से अपना नामांकन दाखिल किया। सोमवार को उन्हें 63,050 वोट मिले और उन्होंने 8000 से अधिक मतों के अंतर से यह सीट जीत ली। यह उनका पहला विधानसभा चुनाव था। इससे पहले वे पेशे से ठेकेदार रहते हुए पंचायत चुनाव लड़ चुके थे। अब उनका बेटा पारिवारिक व्यवसाय संभालता है। फरक्का सीट पर पहले तृणमूल कांग्रेस का कब्जा था, लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी नंबर दो पर रही और टीएमसी नंबर तीन पर चली गई। जिस सीट पर पहले तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) का कब्जा था वह इस बार तीसरे स्थान पर खिसक गई जबकि भारतीय जनता पार्टी दूसरे स्थान पर रही।

‘दुनिया के सबसे भाग्यशाली लोगों में से एक’

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मीडिया से बातचीत में मोताब शेख (Motab Sheikh) ने कहा कि मैं दुनिया के सबसे भाग्यशाली लोगों में से एक हूं। जब मैंने SIR के बाद मतदाता सूची में अपना नाम नहीं देखा तो मैंने उम्मीद छोड़ दी थी। मेंने सोचा कि मैं अब कभी मतदान भी नहीं कर पाऊंगा, लेकिन लोगों ने मेरे लिए वोट किया। यह लोगों की जीत है।

आपको बता दें कि बंगाल में SIR के बाद हुए फैसले में करीब 27.1 लाख वोट डिलीट किए गए। वहीं फरक्का में 38222 लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए। फरक्का विधानसभा सीट मुर्शिदाबाद जिले में आती है। पूरे राज्य में सबसे ज्यादा नाम (11 लाख से ज्यादा) इसी जिले से कटे। इसके अलावा कांग्रेस ने बंगाल में रानीनगर सीट से भी जीत हासिल की है। यह विधानसभा भी मुशिर्दाबाद जिले के तहत आती है। यहां से कांग्रेस उम्मीदवार जुल्फिकार अली ने 2701 वोटों के अंतर से जीत हासिल की और टीएमसी के विधायक अब्दुल सौमिक हुसैन को मात दी। कांग्रेस के जुल्फिकार को कुल 79,423 वोट मिले।

14 दिन ही कर पाए चुनाव प्रचार

मोताब शेख (Motab Sheikh) ने बताया कि लंबे समय तक इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी रही कि उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल होगा या नहीं। चुनाव लड़ने को लेकर भी इसी के चलते अनिश्चितता रही। उन्हें चुनाव प्रचार के लिए सिर्फ 14 दिन का समय ही मिल पाया। मोताब ने कहा कि पहली बात तो यह कि कांग्रेस ने मुझे उम्मीदवार बनाने में समय लगाया और फिर मुझे पता चला कि मतदाता सूची से मेरा नाम हट गया है। मैं अपने आधे विधानसभा क्षेत्र में ही चुनाव प्रचार कर सका। उन्होंने बताया कि अगर उन्हें प्रचार के लिए और समय मिला होता तो जीत का अंतर और ज्यादा होता।

गौर करने वाली बात है कि साल 2016 में फरक्का सीट पर कांग्रेस का कब्जा था। कांग्रेस का कहना है कि शेख की जीत भारत निर्वाचन आयोग की वजह से ‘समान अवसर (Level Playing Field) की कमी’ का सबूत है। कांग्रेस प्रवक्ता सौम्य ऐच रॉय ने कहा कि निर्वाचन आयोग का कर्तव्य है कि वह त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार करे। यहां आयोग को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मोताब को नामांकन दाखिल करने की अनुमति देनी पड़ी… उनकी जीत पार्टी में लोगों के विश्वास को दिखाती है।

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भ्रष्टाचार के चलते टीएमसी को लोगों ने किया खारिज

मोताब शेख (Motab Sheikh) हमेशा से कांग्रेस के साथ रहे हैं। उनके पिता और दादा भी जीवरभर कांग्रेस का दामन थामे रहे थे। मोताब शेख ने बताया कि मुशिर्दाबाद की बाकी सीट की तरह फरक्का सीट भी कांग्रेस का गढ़ होती थी, लेकिन फिर टीएमसी आ गई। लेकिन इस बार लोगों ने टीएमसी को हटा दिया है। सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है क्योंकि उनके विधायक लोगों के लिए काम नहीं कर रहे। लोगों ने उनके भ्रष्टाचार के चलते हटा दिया। मैं लोगों के साथ हूं और इसीलिए लोगों ने मुझ पर कृपा की है।

राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने और विधानसभा में कांग्रेस के केवल दो विधायक होने की स्थिति में संभावित समस्याओं पर शेख ने कहा कि मैं बेवजह टकराव में विश्वास नहीं करता। भले ही भाजपा सत्ता में आ गई है, मैं नई सरकार के सहयोग से अपने क्षेत्र के लिए काम कराऊंगा। डोईपुर गांव के निवासी शेख के एजेंडे में सबसे ऊपर पीने के पानी की कमी और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मुद्दा है जिसने 27 लाख लोगों के भविष्य को अनिश्चित बना दिया है। उन्होंने कहा कि मैं विधानसभा में लाखों लोगों की स्थिति को उठाऊंगा।

सुप्रीम कोर्ट में अपील

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अपनी अपील में शेख ने कहा कि उनका नाम 2002 की मतदाता सूची (जो निर्वाचन आयोग के लिए एक आधार है) और उनके वर्तमान दस्तावेजों में नाम की वर्तनी में अंतर के कारण हटा दिया गया। 29 जनवरी को उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया गया। इसके बाद उनका नाम जांच (Adjudication) के लिए भेजा गया और फिर हटा दिया गया।

शेख के पास पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने सुनवाई के दौरान ये सभी दस्तावेज जमा किए थे। फिर भी मेरा नाम हटा दिया गया। इसके बाद जब मेरी पार्टी ने मुझे उम्मीदवार बनाया तो मैंने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख किया।

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अदालत द्वारा मामले को प्राथमिकता के आधार पर सुनने के निर्देश के बाद ट्रिब्यूनल ने शेख के पक्ष में फैसला सुनाया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि आधार कार्ड (Aadhaar Card)  ‘किसी व्यक्ति की पहचान स्थापित करने के लिए मान्य दस्तावेजों में से एक है।’ इसके अनुसार, ट्रिब्यूनल ने भारत निर्वाचन आयोग और उसके अधिकारियों को निर्देश दिया कि संशोधित मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के लिए आधार कार्ड (Aadhaar Card)  को पहचान के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाए।

आधार कार्ड (Aadhaar Card) को शेख की अपील स्वीकार करने के लिए ‘पर्याप्त’ माना गया। ट्रिब्यूनल ने यह भी जिक्र किया कि उनके पास नवंबर 2018 में जारी पासपोर्ट और 2001 का ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License) है जिन दोनों में उनका नाम ‘मोताब शेख (Motab Sheikh)के रूप में दर्ज है। कांग्रेस प्रवक्ता रॉय का कहना है कि शेख का मामला दिखाता है कि ‘कई वास्तविक मतदाता अपने नाम हटाए जाने के कारण वोट नहीं डाल पाए होंगे। यह लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। शेख ने कहा कि मैं चाहता हूं कि फरक्का और अन्य जगहों पर जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं और जो वास्तविक हैं, उन्हें फिर से मतदाता सूची में जगह मिले।

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