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(IAWPC) ने आरोप लगाया है कि हजारों कुत्तों को हर साल मारा जा रहा है। यह एक पशु संगठन इसे नरसंहार करार दे रहे हैं। मोरक्को प्रशासन की दुनियाभर में आलोचना हो रही है। मोरक्को प्रशासन की दुनियाभर में आलोचना हो रही है।
देश पर आरोप है कि वो बेहद क्रूरता से कुत्तों को मार रहे हैं। ये तरीके बेहद क्रूर हैं, जिसमें जहर (स्ट्रिक्नाइन) खाने में मिलाकर या इंजेक्शन देकर, बंदूकों से गोली मारकर, नेक क्लैंप से पकड़कर ट्रकों में भरकर, फिर फेक डिस्पेंसरी में ले जाकर जिंदा जलाना या मास ग्रेव में फेंकना शामिल है। कई कुत्ते घायल होकर तड़पते रहते हैं, चीखते हैं, लेकिन मौत धीमी आती है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि बच्चे यह सब देखकर ट्रॉमा में हैं। AWPC का दावा है कि 3 मिलियन कुत्ते खतरे में हैं।
लंदन स्थित मोरक्को की एंबेसी ने कहा है कि वर्ल्ड कप से जुड़ी ये खबरें अफवाह हैं। सरकार का कहना है कि पशुओं का सही प्रबंधन किया जा रहा है। मानवीय मूल्यों को ध्यान में रखकर यह किया जा रहा है। सरकार ‘ट्रैप, न्यूटर, वैक्सीनेट रिटर्न (TNVR) कार्यक्रम चला रही है। कुत्तों को पकड़ा जा रहा है, नसबंदी की जा रही है, उन्हें पकड़ा जा रहा है फिर छोड़ दिया जा रहा है।
मोरक्को में स्ट्रे डॉग्स की समस्या पुरानी है। हर साल 1 लाख कुत्ते के काटने की घटनाएं होती हैं।
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अगस्त 2025 में मोरक्को ने एक नया कानून का ड्राफ्ट पेश किया था। नए कानूनों के मुताबिक अगर कोई शख्स किसी आवारा परशु को जानबूझकर मारता है, घायल करता है या मार डालता है तो उसे 2 से 6 महीने की जेल और 2000 डॉलर तक जुर्माना देना पड़ सकता है।
फीफा ने कहा कि मोरक्को ने वर्ल्ड कप के ऑक्शन में वादा किया था कि जानवरों को सुरक्षित रखा जाएगा। अब Moroccan Football Federation से इस संबंध में बात की जा रही है। अगर यह क्रूरता सच होती है तो मोरक्को की आलोचना होगी।