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पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह ने पीएम मोदी से मांगा इस्तीफा, पूछे तीखे सवाल क्या हम अमेरिका के हो गए हैं गुलाम?

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) में केंद्रीय मंत्री रहे आर के सिंह (Former Union Minister RK Singh)  ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आर के सिंह (RK Singh)  केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी पर लगातार हमलावर बने हुए हैं। बता दें कि कुछ दिन पहले उन्होंने फेसबुक पर वीडियो जारी कर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। अब एक बार फिर से उन्होंने अमेरिका का नाम लेकर पीएम मोदी (PM Modi) से तीखे सवाल पूछे हैं और उनसे नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने तक की मांग कर दी है।

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नरेंद्र मोदी की सरकार ने इतना नीचे गिरा दिया है जितना मैंने अपने 50 साल की सेवा में कभी नहीं देखा

पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह (Former Union Minister RK Singh) ने अपने फेसबुक पेज पर लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखा है और पीएम मोदी के साथ साथ केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की है। उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि दुनिया में भारत के स्तर को इस नरेंद्र मोदी की सरकार ने इतना नीचे गिरा दिया है जितना मैंने अपने 50 साल की सेवा में कभी नहीं देखा। हम रूस से तेल खरीदते रहे हैं क्योंकि रूसी तेल सस्ता है और रूस हमारा मित्र है। रूस-यूक्रेन लड़ाई का बहाना बनाकर अमेरिका ने भारत पर दबाव डाला कि रूस से तेल खरीदना बंद करे और अमेरिका से तेल खरीदे। यूरोप लगातार रूस से तेल और गैस खरीदता रहा है, और अमेरिका ने कभी उस पर दबाव नहीं डाला कि वह इसे बंद करे या कम करे। खुद अमेरिका भी रूस से कई तरह का सामान खरीदता रहा है और उसे रोकने की बात नहीं करता है। भारत ने इस पर कोई सवाल नहीं उठाया। यह कमजोरी क्यों?

भारत ने अमेरिका के नाजायज कदम के खिलाफ न कुछ कहा और न ही कोई जवाबी टैरिफ लगाया, इस कमजोरी का क्या कारण है?

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अमेरिका ने भारत पर 50% का टैरिफ लगा दिया। अंतरराष्ट्रीय प्रथा के अनुसार भारत को भी अमेरिकी सामग्री, जिसमें डिजिटल सामग्री भी शामिल है, पर उतना ही टैरिफ लगाना चाहिए था। लेकिन भारत ने अमेरिका के नाजायज कदम के खिलाफ न कुछ कहा और न ही कोई जवाबी टैरिफ लगाया। इस कमजोरी का क्या कारण है?

भारत 140 करोड़ आबादी का एक महान देश है। उसे किससे सामग्री खरीदनी है, इसके लिए किसी से इजाज़त लेने की आवश्यकता नहीं है। परंतु खाड़ी युद्ध के बाद भारत को रूस से खरीदे जा रहे तेल की मात्रा बढ़ाने की जरूरत पड़ी तो वह अमेरिका के पास अनुमति मांगने गया। भारत जैसे महान देश के लिए यह शर्मिंदगी की बात है। अमेरिका ने सिर्फ 30 दिन के लिए अनुमति दी। भारतवासियों का सिर शर्म से झुक गया।

प्रधानमंत्री अमेरिका से घबराते हैं, इसका क्या कारण है?

क्या हम अमेरिका के गुलाम हो गए हैं? प्रधानमंत्री अमेरिका से घबराते हैं, इसका क्या कारण है? कांग्रेस का कहना है कि एपस्टीन फाइलों में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी (Petroleum Minister Hardeep Puri) और अनिल अंबानी (Anil Ambani) के साथ-साथ प्रधानमंत्री का भी नाम है और उसी के कारण अमेरिका प्रधानमंत्री से जो कहता है वही वे करते हैं, अर्थात प्रधानमंत्री ब्लैकमेल हो रहे हैं। क्या इसमें कोई सच्चाई है? यदि इसमें कोई सच्चाई है तो देश को शर्मिंदा करने के बजाय प्रधानमंत्री जी को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।

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