Harad in Ayurveda : आयुर्वेद में हरड़ को अमृत कहा जाता है। हरड़ शरीर का ‘स्मार्ट मैकेनिक’ कहा जाता है। ये पूरे शरीर को भीतर से संतुलित और मजबूत बनाती है। वहीं चरक संहिता में इसे त्रिदोष नाशक बताया गया है, यानी यह वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को संतुलन में रखती है। हरड़ आंतों की सफाई करती है और अगर दस्त की प्रवृत्ति है, तो आंतों को मजबूत बनाती है। यही वजह है कि इसे एक Adaptogenic Herbs कहा जाता है।
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हरड़ के फायदे
आयुर्वेद के अनुसार, बीमारी की जड़ शरीर में जमा अधपचा और विषैला पदार्थ। हरड़ इस आम को बाहर निकालने का काम करती है। जब शरीर साफ होता है, तो उसका असर त्वचा, बाल और आंखों पर भी साफ दिखाई देता है।
आयुर्वेद में इसे रसायन की श्रेणी में रखा गया है
चेहरे की रंगत सुधरना, मुंह के छाले ठीक होना और बालों का झड़ना कम होना ये सब हरड़ के नियमित और सही उपयोग से संभव है। यही कारण है कि आयुर्वेद में इसे रसायन की श्रेणी में रखा गया है, जो शरीर को अंदर से नया बनाती है।
चेहरे की रंगत सुधरना, मुंह के छाले ठीक होना और बालों का झड़ना कम होना ये सब हरड़ के नियमित और सही उपयोग से संभव है। यही कारण है कि आयुर्वेद में इसे रसायन की श्रेणी में रखा गया है, जो शरीर को अंदर से नया बनाती है।
हरड़ शरीर की रक्षा ढाल
हरड़ को अमृत कहे जाने का एक बड़ा कारण इसकी Immunity बढ़ाना भी है। बदलते मौसम में बार-बार सर्दी-जुकाम होना, गले में कफ जमना या जल्दी थक जाना, इन सब में हरड़ शरीर की रक्षा ढाल की तरह काम करती है। यह लिवर को भी मजबूत करती है, जिससे खून साफ रहता है और ऊर्जा बनी रहती है।
हालांकि हरड़ जितनी फायदेमंद है, उतनी ही सावधानी भी जरूरी है। बहुत अधिक मात्रा लेने से दस्त या कमजोरी हो सकती है। गर्भवती महिलाओं और बहुत ज्यादा कमजोर लोगों को इसका सेवन बिना चिकित्सक की सलाह के नहीं करना चाहिए।