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Janmashtami 2025 : जन्माष्टमी व्रत नहीं कर पा रहे हैं तो किन उपायों से मिलता है व्रत के बराबर पुण्य? जानें पंडित जी से

By Aakansha Upadhyay 
Updated Date

भगवान श्री कृष्ण परम दयालु और कृपालू है। वो पाने भक्त को कभी दुख में नहीं देख सकते हैं। ऐसे में ये व्रत बहुत खास होता है। वहीं कभी कभी  हम लोग  जब कोई खास व्रत होता है तो हम किसी कारण व्रत नहीं रख पाते हैं। कल   जन्माष्टमी का फेस्टिवल है जिसमें लोग व्रत रहकर भगवान श्री कृष्ण की पूजा अर्चना करते हैं।ऐसे में पंडित जी ने कुछ उपायों को बताया है जिन्हें करके व्रत के बराबर पुण्य प्राप्त किया जा सकता है।

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भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के साथ व्रत या उपवास का भी खास महत्व होता है। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत करने से जाने-अनजाने में हुए पाप खत्म हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। लेकिन कई बार भक्त स्वास्थ्य या निजी कारणों से जन्माष्टमी व्रत नहीं कर पाते हैं, ऐसे में कुछ उपायों को करके व्रत का फल प्राप्त किया जा सकता है।

जन्माष्टमी व्रत का फल पाने के लिए करें ये उपाय

पंडित जी के अनुसार, अगर किसी खास वजह से जन्माष्टमी व्रत इस बार नहीं कर पा रहे हैं तो किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भरपेट भोजन कराना चाहिए। अगर ऐसा करना संभव नहीं है तो किसी जरूरतमंद व्यक्ति को इतना धन का दान करें कि वह दो समय भरपेट भोजन कर सके।

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गायत्री मंत्र का करें जाप

पंडित की मानें तो अगर ऐसा करना भी संभव नहीं है तो गायत्री मंत्र का 1000 बार जाप करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से जन्माष्टमी व्रत का फल प्राप्त होता है।

पूजन सामग्री व पारण में लगने वाली सामग्री का दान

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, अगर जन्माष्टमी व्रत के नियमों का पालन करना व रखना संभव नहीं है तो व्रत करने वाले व्यक्ति को समस्त पूजन सामग्री व व्रत पारण में लगने वाली चीजों का दान करना चाहिए।

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भगवान श्रीकृष्ण की विधिवत करें पूजा-अर्चना

पंडित जी के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति किसी खास कारण से जन्माष्टमी व्रत करने में असमर्थ है, तो उसे जन्माष्टमी पूजन विधि-विधान से करना चाहिए। आधी रात को कृष्णजी के जन्म के बाद ही भोजन करना चाहिए।

श्रीकृष्ण भगवान की भक्ति में रहें लीग

अगर जन्माष्टमी का व्रत नहीं कर पा रहे हैं तो, भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन रहना चाहिए और उनसे क्षमा मांगनी चाहिए और ‘हरे कृष्णा हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा हरे हरे’ मंत्र का अधिक से अधिक जाप करना चाहिए।

 

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