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पटना हाई कोर्ट का अहम फैसला, कहा-महिला के ऊपर लेटकर उसका मुंह दबाना अपने आप में दुष्कर्म के प्रयास का अपराध नहीं

By santosh singh 
Updated Date

पटना। पटना हाई कोर्ट (Patna High Court) ने अपने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी महिला के ऊपर लेटकर उसका मुंह दबाना, जब तक कि शारीरिक संबंध (Sexual Relations) बनाने की दिशा में किसी स्पष्ट कृत्य के सबूत न हों, भारतीय दंड संहिता की धारा 376/511 (Section 376/511 of the Indian Penal Code) के तहत दुष्कर्म के प्रयास के अपराध को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

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न्यायाधीश संदीप कुमार (Justice Sandeep Kumar) की अदालत ने 2013 की दोषसिद्धि के खिलाफ दायर एक अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यह स्पष्ट किया कि आरोपी का यह कृत्य महिला की लज्जा भंग करने (आईपीसी की धारा 354) के तहत आता है। अदालत ने इसके साथ ही धारा 448 के तहत घर में घुसपैठ की सजा को बरकरार रखते हुए दोषसिद्धि में बदलाव किया है।

क्या है मामला?

यह घटना 8 फरवरी 2010 की है जो बिहार के बेगूसराय जिले में हुई थी। शिकायत के अनुसार, अपीलकर्ता मो. अनियुल हक रात करीब 10 बजे एक विधवा महिला के घर में घुसा जब वह सो रही थी। महिला का आरोप था कि आरोपी ने उसका मुंह दबाया और उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। जब महिला ने शोर मचाया, तो ग्रामीण इकट्ठा हो गए, जिन्होंने आरोपी को पकड़कर उसकी पिटाई की। इसके बाद पीड़िता ने 10 फरवरी 2010 को अदालत का रुख किया।

बेगूसराय स्थित ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दुष्कर्म के प्रयास (धारा 376/511) और घर में घुसपैठ (धारा 448) के अपराधों में दोषी ठहराते हुए चार साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। जिसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी।

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हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यद्यपि आरोपी का घर में प्रवेश करना और महिला का मुंह दबाना साबित हुआ है, लेकिन इस बात का कोई सबूत नहीं है कि उसने कपड़े उतारे हों या शारीरिक संबंध (Sexual Relations) बनाने की दिशा में कोई कृत्य किया हो।

हाई कोर्ट कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए आरोपी के कृत्य को महिला की लज्जा भंग करने (धारा 354 आईपीसी) के दायरे में माना। आरोपी के लगभग 60 वर्ष की आयु के होने को देखते हुए, अदालत ने उसकी मुख्य सजा को पहले काटी गई अवधि तक सीमित कर दिया है। हालांकि, पीड़िता को न्याय देने के उद्देश्य से उस पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जो बतौर मुआवजा सीधे पीड़िता को मिलेगा।

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