लखनऊ। पिछले कुछ वर्षों में ईरान ने अपनी मिसाइल तकनीक में जो प्रगति की है, उसने वैश्विक सुरक्षा समीकरणों को बदल दिया है। मार्च 2026 की ताजा सैन्य रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की मिसाइलें अब केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे यूरोप के महत्वपूर्ण हिस्सों तक पहुंचने की क्षमता रखती हैं। ईरान के पास वर्तमान में मध्य-पूर्व में मिसाइलों का सबसे बड़ा और विभिन्न प्रकार का जखीरा है। हाल ही के परीक्षणों और हिंद महासागर में चार हजार किलोमीटर दूर स्थित ‘डिएगो गार्सिया’ सैन्य बेस पर हुए हमलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ईरान की मिसाइल तकनीक में भारी सुधार हुआ है। ईरान की ‘खुर्रमशहर-4’ और ‘सेजिल’ जैसी बैलिस्टिक मिसाइलें दो हजार से चार हजार किलोमीटर तक मार कर सकती हैं। इस दायरे में तुर्की, ग्रीस, इटली, रोमानिया, बुल्गारिया और यहां तक कि जर्मनी के कुछ हिस्से भी आ जाते हैं।
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इजराइली रक्षा बलों (IDF) ने बार-बार चेतावनी दी है कि ईरान जानबूझकर ऐसी मिसाइलें विकसित कर रहा है जो रोम, बर्लिन और पेरिस जैसे यूरोपीय शहरों को निशाना बना सकें। हालांकि, ब्रिटेन और कुछ अन्य यूरोपीय देशों का मानना है कि ईरान का प्राथमिक लक्ष्य फिलहाल क्षेत्रीय दबदबा बनाना है, न कि सीधे यूरोप पर हमला करना। फिर भी, मिसाइलों की यह बढ़ती रेंज यूरोपीय कूटनीति के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गई है। ईरान के इस बढ़ते खतरे को देखते हुए, नाटो (NATO) ने अपनी सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत किया है। रोमानिया और पोलैंड में तैनात ‘एजिस एशोर’ (Aegis Ashore) जैसे मिसाइल डिफेंस सिस्टम ईरान से आने वाली किसी भी संदिग्ध मिसाइल को हवा में ही नष्ट करने के लिए तैयार हैं। सैन्य विशेषज्ञों का दावा है कि ये प्रणालियां 90% से अधिक सटीकता के साथ खतरों को बेअसर कर सकती हैं।
रिपोर्ट- सुशील कुमार साह