नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश (Jairam Ramesh) द इंडियन एक्सप्रेस (The Indian Express) को विभिन्न राजनीतिक और समसामयिक विषयों पर कई इंटरव्यू दिए हैं। उन्होंने कहा कि राम ट्रस्ट से जुड़ा घोटाला जिस तरह से सामने आया है, वह बीजेपी और आरएसएस के संरक्षण में हुई एक बेहद शर्मनाक घटना है।
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6 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया, इसके बाद भी अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर बने हुए हैं
जयराम रमेश ने कहा कि 6 अप्रैल, 2026 को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अरुणाचल प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री के खिलाफ़ सीबीआई जांच (CBI Investigation) का आदेश दिया। कोर्ट 2015 से 2025 के बीच PWD के सभी कॉन्ट्रैक्ट्स की सीबीआई जांच चाहती थी और सीबीआई जांच (CBI Investigation) चलने के बावजूद मुख्यमंत्री अपने पद पर बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि लगातार पेपर लीक, NEET और CBSE से जुड़े मुद्दे सामने आ रहे हैं। हमारी लगातार और ज़ोरदार मांग है कि प्रधानमंत्री को इस्तीफ़ा देना चाहिए।
The way the scam around the Ram Trust has unfolded is an absolute shame that happened under the patronage of the BJP and the RSS.
On the 6th April, 2026, the Supreme Court directed a CBI inquiry against a sitting Chief Minister in Arunachal Pradesh. They wanted a CBI inquiry… pic.twitter.com/cxGjmdh0Dr
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जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने ने बताया कि 17 अप्रैल, 2026 को शर्मनाक हार का सामना करने के बाद भी बीजेपी परिसीमन बिलों को फिर से लाने की पूरी कोशिश करेगी। उन्होंने कहा कि हमारी तरफ़ से हम राम ट्रस्ट से जुड़े घोटाले, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से जुड़े घोटाले, सुप्रीम कोर्ट के सीबीआई जांच (CBI Investigation) के आदेश के बावजूद अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद पर बने रहना और NEET व CBSE के मामले में साबित हो चुकी अक्षमता के बावजूद शिक्षा मंत्री का पद पर बने रहने का मुद्दा उठाएंगे।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मौके का फ़ायदा उठाकर खुद को आरएसएस इकोसिस्टम का हिस्सा बना लिया
उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ऐसे घटिया दर्जे के शिक्षाविदों द्वारा शिक्षण संस्थानों पर पूरी तरह कब्ज़ा करने की प्रक्रिया की अगुवाई कर रहे हैं, जिनकी एकमात्र योग्यता यह है कि उन्होंने मौके का फ़ायदा उठाकर खुद को आरएसएस इकोसिस्टम का हिस्सा बना लिया है। जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने कहा कि मध्य प्रदेश घोटाले की बारीकियों को सामने लाने का पूरा श्रेय ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को जाता है। इसकी मोटी-मोटी जानकारी तो पहले से ही थी, खासकर उज्जैन के मामले में।
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The Indian Express deserves full credit for coming out with the granular details on the Madhya Pradesh scam. The broad details were known, particularly in the case of Ujjain.
I remember that during the Bharat Jodo Nyaya Yatra, people were talking about it even then. Ujjain,… pic.twitter.com/JHYWMuBRwD
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उन्होंने कहा कि मुझे याद है कि ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान भी लोग इस बारे में बात कर रहे थे। दिलचस्प बात यह है कि उज्जैन ही वह एकमात्र जगह थी जहां से हम दोनों यात्राओं – ‘भारत जोड़ो यात्रा’ (Bharat Jodo Yatra) और ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ (Bharat Jodo Nyay Yatra) के दौरान गुज़रे थे। मुख्यमंत्री इसमें सीधे तौर पर शामिल थे, लेकिन ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ (The Indian Express) की जांच से हमें जो बारीकियां मिली हैं, उन्हें मध्य प्रदेश और दिल्ली में मेरे सहयोगियों ने आगे बढ़ाया है। इसलिए, आने वाले मॉनसून सत्र में यह निश्चित रूप से एक बड़ा मुद्दा बनने वाला है।
There are grave environmental threats that we are facing. Great Nicobar project is one such example. I myself have written to Rajnath Singh ji and also given suggestions on how this can be done while respecting environmental laws and tribal laws.
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We have the issue of coal mining… pic.twitter.com/896teGgB3o
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जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने कहा कि हम पर्यावरण से जुड़े गंभीर खतरों का सामना कर रहे हैं। ‘ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट’ इसका एक उदाहरण है। मैंने खुद राजनाथ सिंह जी को पत्र लिखा है और सुझाव भी दिए हैं कि पर्यावरण और आदिवासी कानूनों का सम्मान करते हुए इसे कैसे किया जा सकता है। हमारे सामने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के घने जंगलों वाले इलाकों में कोयला खनन का मुद्दा है। हमारे सामने मॉनसून के अनिश्चित होने की समस्या है, जो जलवायु परिवर्तन के कारण हो रही है। हमारे सामने गर्मी के तनाव और अरावली पहाड़ियों से जुड़े मुद्दे भी हैं।
उन्होंने कहा कि हमें विकास की ज़रूरतों और पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं के बीच संतुलन बनाना होगा। हमें तेज़ी से आर्थिक विकास और ज़्यादा GDP ग्रोथ की ज़रूरत है। लेकिन ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ (कारोबार में आसानी) के नाम पर, मोदी सरकार असल में पर्यावरण कानूनों को खत्म कर रही है, सभी पर्यावरण नियमों को हटा रही है और पर्यावरण मानकों को कमज़ोर कर रही है। प्रदूषण अब सिर्फ़ पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गया है। यह मूल रूप से जन-स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है। इन चिंताओं पर ध्यान देने की ज़रूरत है।
उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति के खुद को चाणक्य कहने वाले नेता ने अपनी पार्टी और अपने ‘साहब’ को भरोसा दिलाया था कि वे परिसीमन बिल पर लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लेंगे। 17 अप्रैल को कुल 528 सांसद मौजूद थे और उन्होंने वोटिंग में हिस्सा लिया। संविधान के अनुसार, उस संशोधन को पास करने के लिए मौजूद और वोट करने वाले सदस्यों में से दो-तिहाई की मंज़ूरी ज़रूरी थी। इसलिए, 528 सदस्यों की मौजूदगी में उन्हें 352 वोटों की ज़रूरत थी। उन्हें 298 वोट मिले। ज़ाहिर है, उनके सारे हिसाब-किताब गलत साबित हुए।
The self-declared, self-proclaimed, self-styled Chanakya of Indian politics assured his party and his Sahib that he was going to secure a two-thirds majority in the Lok Sabha on the delimitation bill.
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A total of 528 MPs were present and voted on the 17th of April. According to… pic.twitter.com/FLbiS1lZ7w
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उनकी सोच गलत थी। उन्हें इतने बड़े स्तर पर विरोध, एकता और एकजुटता की उम्मीद नहीं थी। उन्हें शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा और यह गृह मंत्री और प्रधानमंत्री के चेहरों पर साफ दिख रहा था। अब वे परिसीमन बिल पास करवाना चाहते हैं। इसलिए पहले उन्होंने पश्चिम बंगाल में ‘ऑपरेशन लोटस’ चलाया और फिर महाराष्ट्र में ‘ऑपरेशन टाइगर’। परिसीमन बिल 23 सितंबर, 2023 को पास हुआ था, लेकिन इसकी अधिसूचना 16 अप्रैल, 2026 की रात को जारी की गई। जयराम रमेश ने कहा कि ‘400 पार’ का असली मकसद यह था कि वे संविधान को फिर से लिख सकें या नया संविधान बना सकें, ताकि आरक्षण जैसे मुद्दे को खत्म किया जा सके, जो लंबे समय से उन्हें खटकता रहा है।
उनकी योजना यह है कि मॉनसून सत्र में परिसीमन का मुद्दा हावी रहे। लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे क्योंकि NEET का मुद्दा, CBSE का मुद्दा और राम ट्रस्ट का मुद्दा भी है। ये सभी मुद्दे भारतीय समाज पर परिसीमन के मुद्दे की तुलना में कहीं ज़्यादा गंभीर असर डालते हैं। खुद को ‘विश्व गुरु’ कहने वाले की असलियत पूरी तरह सामने आ गई है। पाकिस्तान को अब वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर अहमियत मिल गई है। हमारे ‘विश्व गुरु’ का क्या हुआ?
The self-styled 'Vishwa Guru' has been totally exposed. Pakistan has now found a position of global and regional influence. What happened to our Vishwa Guru?
Our Vishwa Guru went to Israel two days before the Israel-America attack began. He just goes to every other country and… pic.twitter.com/YNms1zRg92
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इज़राइल-अमेरिका का हमला शुरू होने से दो दिन पहले हमारे ‘विश्व गुरु’ इज़राइल गए थे। वे बस दूसरे देशों में जाते हैं और कोई न कोई अवॉर्ड ले आते हैं। यह सब पहले से तय होता है। इन देशों को बताया जाता है कि भारत के प्रधानमंत्री आ रहे हैं और उनसे उन्हें अवॉर्ड देने के लिए कहा जाता है। उन्हें अवॉर्ड मिलता है और बाद में भारत में यह बड़ी खबर बन जाती है। भारत के कई प्रधानमंत्रियों को अलग-अलग अवॉर्ड मिले हैं। लेकिन कभी भी इसका इस तरह से प्रचार-प्रसार या ढिंढोरा नहीं पीटा गया।