Kadhi : भगवान शिव को समर्पित सावन मास में भक्त भगवान भोलेनाथ की सेवा पूजा करते हैं और उनको प्रिय भोग्य पदार्थ अर्पित करते है। इसके साथ ही सावन में लोग पूजा-पाठ से अलग अपने खानपान और जीवनशैली में भी कई धार्मिक नियमों का पालन करते हैं। इन्हीं परंपराओं में एक मान्यता यह भी है कि इस पूरे महीने कढ़ी नहीं खानी चाहिए। सावन में कढ़ी खाने से मनाही होती है। आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य संजय पांडेय से इसका मुख्य कारण।
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ज्योतिषाचार्य संजय पांडेय बताते हैं कि धार्मिक मान्यता है कि भोलेनाथ को इस महीने में कच्चा दूध, दही और अन्य दुग्ध पदार्थ अर्पित किए जाते है। इन्हें भगवान की पूजा के लिए बेहद पवित्र माना जाता है। इसलिए इस महीने दूध और दही से बनी चीजों का सेवन निषेध बताया गया है। कढ़ी बनाने में दही का इस्तेमाल होता है, इसलिए सावन में इसे खाने की परंपरा नहीं है।
आयुर्वेद के कारण
आयुर्वेद के अनुसार, सावन यानी बरसात के मौसम में पाचन शक्ति (अग्नि) कमजोर हो जाती है। कढ़ी खट्टी और भारी होती है, जिसे पचाना कठिन होता है। नमी के कारण इस मौसम में बैक्टीरिया और कीटाणु जल्दी पनपते हैं।
दही या खट्टे खाद्य पदार्थ पेट में गैस और अपच की समस्या बढ़ा सकते हैंं।इस दौरान दही खाने से शरीर में कफ और वात दोष बढ़ सकता है, जिससे पेट खराब होना, सूजन या सर्दी-जुकाम जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए इस मास में दही या कढ़ी से परहेज की सलाह दी जाती है।