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पद संभालते ही केरलम के राज्यपाल ने लोकभवन में नॉनवेज रोका: कांग्रेस बोली- लोग तय करेंगे उन्हें क्या खाना है

By Harsh 
Updated Date

डिजिटल, पर्दाफाश।  केरलम के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर के पद संभालने के कुछ ही घंटों बाद लोकभवन की रसोई में मांसाहारी खाना बनाने और परोसने पर रोक लगाए जाने की खबर सामने आई। इस फैसले को लेकर कांग्रेस और CPI(M) ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने कहा कि लोगों की खान-पान की पसंद तय करना राज्यपाल का काम नहीं है।

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कांग्रेस ने फैसले को बताया हद पार करना

कांग्रेस महासचिव और अलप्पुझा के सांसद केसी वेणुगोपाल ने फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि केरलम की अपनी खान-पान की संस्कृति है। तटीय राज्य होने के कारण यहां मछली लोगों के भोजन का अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी पसंद के मुताबिक शाकाहारी या मांसाहारी भोजन चुनने की आजादी होनी चाहिए।

राज्यपाल कार्यालय ने क्या सफाई दी?

राज्यपाल कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक, माथुर शाकाहारी हैं और इसी वजह से लोकभवन की रसोई में यह बदलाव किया गया। सूत्रों ने स्पष्ट किया कि रसोई में तैयार खाना केवल राज्यपाल और उनके निजी स्टाफ के कुछ सदस्यों को दिया जाता है। बाकी कर्मचारी घर से खाना लाते हैं या बाहर खाते हैं। उनके खान-पान पर कोई रोक नहीं लगाई गई है।

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भोजन के अधिकार और संस्कृति पर बहस

संविधान का अनुच्छेद 21 गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार की गारंटी देता है। भोजन और पोषण भी इससे जुड़े महत्वपूर्ण पहलू हैं। हालांकि इस मामले में कानूनी सवाल इस बात पर निर्भर करेगा कि आदेश किस पर लागू है और उसका वास्तविक दायरा क्या है।

केरलम में मछली पारंपरिक खान-पान के साथ रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और निर्यात से भी जुड़ी है। ऐसे में लोकभवन की रसोई में मांसाहारी भोजन पर रोक की खबर ने व्यक्तिगत खान-पान की पसंद और संस्थागत नियमों को लेकर राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

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