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ममता बनर्जी ने उठाया बड़ा कदम, कल्याण बनर्जी को नियुक्त किया लोकसभा में टीएमसी का मुख्य सचेतक

By Abhimanyu 
Updated Date

TMC Turmoil : टीएमसी की चेयरपर्सन ममता बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर जानकारी दी कि कल्याण बनर्जी को तत्काल प्रभाव से लोकसभा में टीएमसी का चीफ व्हिप नियुक्त किया गया है। पत्र में अनुरोध किया गया कि इस जानकारी को रिकॉर्ड में लिया जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब कथित तौर पर टीएमसी के लोकसभा 28 सांसदों में से 20 ने एनडीए सरकार को समर्थन देने का फैसला किया है।

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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखे पत्र में ममता बनर्जी ने कहा, ” मैं ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की संस्थापक अध्यक्ष और ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष के तौर पर आपको यह पत्र लिख रही हूँ। आपको सूचित करना है कि श्री कल्याण बनर्जी को तत्काल प्रभाव से लोकसभा में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया है। यह आपकी जानकारी और आवश्यक कार्रवाई के लिए है। आपके सहयोग के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।”

टीएमसी की प्रेस कॉन्फ्रेंस 

टीएमसी में उठा-पटक के बीच कल्याण बनर्जी ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “आप जानते हैं कि कल कुछ घटनाएँ हुईं। TMC नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने कल राज्यसभा से इस्तीफ़ा दे दिया। उन्होंने कुछ आरोप लगाए हैं। उन आरोपों में कितनी सच्चाई है, इस पर सवाल हो सकते हैं। हालाँकि, हमारा मानना ​​है कि इस्तीफ़ा देकर उन्होंने सही काम किया है और नैतिक मूल्यों व राजनीतिक नैतिकता का पालन किया है। ऐसा ही होना चाहिए। अगर किसी के पार्टी से मतभेद हों, अगर उनके कामों से पार्टी लोगों के सामने शर्मिंदा हो, अगर उन्हें पार्टी से कई शिकायतें हों, या अगर वे अब पार्टी के साथ नहीं रहना चाहते और किसी और का समर्थन करना चाहते हैं, तो इस्तीफ़ा देना उनकी नैतिक ज़िम्मेदारी है।”

उन्होंने आगे कहा, “जैसे सुखेंदु शेखर रॉय ने इस्तीफ़ा दिया, वैसे ही ऐसी स्थिति में दूसरों को भी इस्तीफ़ा दे देना चाहिए। मुझे नहीं पता कि कितने लोगों ने हस्ताक्षर किए, कितनों ने नहीं, या असल में क्या हुआ। मुझे नहीं पता कि कौन क्या दावा कर रहा है। लेकिन 24 घंटे बीत जाने के बाद भी, काकोली घोष दस्तीदार ने जो पत्र भेजने की बात कही थी, वह अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। वह पत्र अभी तक किसी ने नहीं देखा है। अगर ईमानदारी इतनी ज़रूरी बात है, और नैतिकता इतनी अहम है, तो उस पत्र को क्यों नहीं दिखाया जा सका?”

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एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कीर्ति आज़ाद ने कहा, “तृणमूल कांग्रेस – जो ‘मां, माटी, मानुष’ की पार्टी है – उसके ज़रिए, दीदी के आशीर्वाद और अभिषेक के समर्थन व मार्गदर्शन से हमारे सभी 29 सांसद चुने गए थे। मैं इन ‘गद्दारों’ से पूछना चाहता हूं… अगर आपको कोई समस्या या शिकायत थी, तो आपने चुनाव के बाद ही उन्हें क्यों ज़ाहिर किया? आपको ये बातें चुनाव से पहले उठानी चाहिए थीं। चुनाव के बाद कई आरोप लगाए गए। शुभेंदु शेखर ने आरोप लगाए और फिर इस्तीफ़ा दे दिया। वे आरोप सही थे या गलत, यह अलग बात है। लेकिन कम से कम उन्होंने राजनीतिक नैतिकता तो दिखाई। उन्होंने उस पार्टी से इस्तीफ़ा दिया जिससे वे जुड़े थे, उस पार्टी के चुनाव चिह्न पर मिली राज्यसभा सदस्यता छोड़ी और पद से हट गए।

बागी सांसदों को चुनौती देते हुए आज़ाद ने आगे कहा, “अगर आपमें भी राजनीतिक नैतिकता है, तो आप भी इस्तीफ़ा दें और बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ें। अगर आपमें ज़रा भी आत्म-सम्मान, नैतिकता और मर्यादा है, तो खड़े हों और खुलकर कहें कि आप अब तृणमूल कांग्रेस के साथ नहीं हैं। और अगर आपके चुनाव क्षेत्र में तृणमूल कार्यकर्ताओं पर हमला होता है, तो कल्याण (बनर्जी) दा के नेतृत्व में हम वहां जाएंगे और उनके साथ खड़े होंगे, क्योंकि हम अपने लोगों को धोखा नहीं देते। और ऐसे समय में, जब हमें हराया गया, तो मैं साफ़ कर दूं… बंगाल में हम अपनी वजह से नहीं हारे। हमें सबके एकजुट होकर हमारे ख़िलाफ़ की गई सामूहिक कोशिश से हराया गया।”

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