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सरकार ने CJP के इन छह सवालों को लोकसभा में किया नामंजूर! सौरव दास ने पूछा- संसद नहीं तो कहां मिलेगा जवाब

CJP vs. Government : संसद के मॉनसून सत्र हाल ही खत्म हुआ है, जो राम मंदिर चढ़ावा चोरी और दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ज्यादती जैसे मुद्दों को लेकर काफी हंगामेंदार रहा है। इन मुद्दों को लेकर विपक्ष लगातार गृह मंत्री अमित शाह से जवाब की मांग करता रहा। वहीं, अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने केंद्र सरकार पर संसद में विपक्ष की आवाज दबाने का गंभीर आरोप लगाया है। दास ने कहा कि लोकसभा सांसद मथेश्वरन वी.एस. ने सीजेपी के नेतृत्व में प्रदर्शन से जुड़े सवालों के जवाब मांगे थे। जिन्हें केंद्र सरकार ने रद्द कर दिया। उन्होंने पूछा कि इन सवालों के जवाब अगर संसद में नहीं मिलेंगे तो कहां मिलेंगे? 

By Abhimanyu 
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CJP vs. Government : संसद के मॉनसून सत्र हाल ही खत्म हुआ है, जो राम मंदिर चढ़ावा चोरी और दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ज्यादती जैसे मुद्दों को लेकर काफी हंगामेंदार रहा है। इन मुद्दों को लेकर विपक्ष लगातार गृह मंत्री अमित शाह से जवाब की मांग करता रहा। वहीं, अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने केंद्र सरकार पर संसद में विपक्ष की आवाज दबाने का गंभीर आरोप लगाया है। दास ने कहा कि लोकसभा सांसद मथेश्वरन वी.एस. ने सीजेपी के नेतृत्व में प्रदर्शन से जुड़े सवालों के जवाब मांगे थे। जिन्हें केंद्र सरकार ने रद्द कर दिया। उन्होंने पूछा कि इन सवालों के जवाब अगर संसद में नहीं मिलेंगे तो कहां मिलेंगे?

पढ़ें :- कॉकरोच जनता पार्टी का Instagram अकाउंट हटा तो CJP ने स्वतंत्रता दिवस पर आवाज़ को दबाने की कोशिश का लगाया आरोप

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने रविवार को एक्स पोस्ट में लिखा, “हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा सत्र के दौरान, केंद्र सरकार के कहने पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व में हुए युवा विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े तीन सेट के सवालों को मंज़ूरी नहीं दी गई। लोकसभा सांसद मथेश्वरन वी.एस. ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से तीन सेट सवालों (नोटिस रेफरेंस नंबर 101799 और 101801) के ज़रिए जवाब मांगे थे। और ज़रा देखिए कि संसद से किन चीज़ों पर जवाब मांगा जा रहा था: 1. NEET-UG 2026 के लिए आवेदन शुल्क की वापसी 2. सरकार के प्रति जनता का बढ़ता अविश्वास 3. दिल्ली में CJP प्रदर्शनकारियों को पीने के पानी और साफ़-सफ़ाई की सुविधा न देना 4. प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के साथ सरकार का संवाद 5. छात्रों का कल्याण, पेपर लीक और शिक्षा में सुधार 6. शांतिपूर्ण विरोध के अपने मौलिक अधिकार का इस्तेमाल करने वाले नागरिकों के साथ व्यवहार…”

सौरव दास ने आगे लिखा, ” फिर भी, नियम 41(2) का हवाला देते हुए इन सवालों को मंज़ूरी नहीं दी गई; इसमें नियम के क्लॉज़ (i), (iv), (v), (xviii) और (xxii) शामिल थे। पूरी तरह से जायज़ सवालों के लिए बहुत अजीब तर्क दिए गए। अगर संसद में ये सवाल नहीं पूछे जा सकते, तो सरकार को असल में कहाँ जवाबदेह ठहराया जाएगा? क्या विरोध-प्रदर्शनों के ज़रिए? उन अहम हफ़्तों के दौरान गृह मंत्री अमित शाह संसद में क्यों नहीं आए और प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ पुलिस की कार्रवाई से जुड़े सवालों का जवाब क्यों नहीं दिया? ” उन्होंने कहा, “एक सांसद का सरकार से सवाल पूछने का अधिकार कोई मामूली प्रक्रियात्मक बाधा नहीं है, बल्कि यह संसदीय लोकतंत्र की आत्मा है। ‘प्रश्नकाल’ (Question Hour) इसलिए होता है क्योंकि जिन मंत्रियों के पास जनता की भारी ताकत होती है, उन्हें जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को जवाब देना ही होता है। वरना, ज़ाहिर है कि लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। आप संसद की आवाज़ नहीं दबा सकते और न ही उसे अपनी अधूरी नीतियों पर बस रबर-स्टैम्प की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। आप युवाओं को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते। भारत के बारे में हमारी सोच ऐसी नहीं है!”

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