हैदराबाद के बोनालु उत्सव (Bonalu Festival) में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के बाद तेलगु अभिनेत्री फारिया अब्दुल्ला (Actress Faria Abdullah) को जमकर ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा है। उन्हें सोशल मीडिया (Social Media) पर कुछ यूजर्स कथित तौर पर 'काफिर' कह रहे हैं। ट्रोल किए जाने के बाद फारिया ने इस पर चुप्पी तोड़ी है।
हैदराबाद। हैदराबाद के बोनालु उत्सव (Bonalu Festival) में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के बाद तेलगु अभिनेत्री फारिया अब्दुल्ला (Actress Faria Abdullah) को जमकर ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा है। उन्हें सोशल मीडिया (Social Media) पर कुछ यूजर्स कथित तौर पर ‘काफिर’ कह रहे हैं। ट्रोल किए जाने के बाद फारिया ने इस पर चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने अपना रिएक्शन वीडियो सोशल मीडिया (Social Media) पर साझा किया है। इसमें वे फूट-फूटकर रोती दिख रही हैं।
क्यों किया जा रहा फारिया को ट्रोल?
बता दें कि टॉलीवुड एक्ट्रेस फारिया अब्दुल्ला (Tollywood actress Faria Abdullah) ने बीते दिनों हैदराबाद के पुराने शहर स्थित श्री महाकालेश्वर अम्मावरी मंदिर(Sri Mahakaleshwar Ammavari Temple) में बोनालु उत्सव (Bonalu Festival) में हिस्सा लिया। इस दौरान फारिया ने अन्य महिलाओं के साथ बोनम उठाया। वे इस उत्सव में पूरे हर्षोल्लास के साथ डांस करते हुए नजर आईं। उनका यह वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल हुआ, कुछ लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। फारिया की मुस्लिम पहचान पर सवाल उठाने लगे। इसे लेकर अभिनेत्री ने अब ट्रोलर्स को मुंहतोड़ जवाब दिया है।
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फारिया ने अपनी मुस्लिम पहचान पर की बात
फारिया ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से एक वीडियो साझा किया है। इसमें वे ट्रोल करने वालों को जवाब देते हुए अपनी मुस्लिम आस्था और पहचान पर बात करती दिखी हैं। फारिया इसमें रोती नजर आ रही हैं। उन्होंने अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि का भी जिक्र इस वीडियो में किया है। वे कहती हैं ‘मेरे पिता कन्वर्टेड मुस्लिम हैं। क्या आप समझते हैं इसका क्या मतलब है? उन्होंने इस्लाम अपनाया क्योंकि उन्हें यह धर्म पसंद आया था’।
फारिया ने वीडियो में क्या कहा?
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एक्ट्रेस ने आगे कहा कि मेरी परवरिश कैसी रही होगी, जब कोई मुझे किसी धर्म की अच्छी बातें सिखा रहा हो क्योंकि वे उसे इतना पसंद करते थे कि उसे अपनाना चाहते थे? मैंने हमेशा इस्लाम की अच्छाइयां ही देखी हैं। सच कहूं तो मैं आपके लिए भी अच्छा ही चाहती हूं। वीडियो में आगे फारिया कहती हैं कि उन्होंने बचपन से हमेशा इस्लाम के खूबसूरत पहलुओं को देखा और सीखा है। उन्होंने आगे कहा कि कुछ लोग उन्हें ‘काफिर’ कह रहे हैं। लोगों का कहना है कि वे गलत राह की तरफ बढ़ रही हैं। इस तरह की नेगेटिव बातें करने वालों को संबोधित करते हुए फारिया ने कहा कि वे नफरत के बदले भी प्यार भेजती रहेंगी।
फारिया ने कहा, ‘मुझे पेड़, पत्थर और तितलियों समेत अपने आसपास की हर चीज में ईश्वर और जिंदगी नजर आती है’। अपनी बात रखते हुए फारिया अपने इमोशंस पर काबू नहीं रख पाईं और ऑन कैमरा रोने लगीं। फारिया के इस वीडियो पर कई यूजर्स और फैंस उनके सपोर्ट में आए हैं। लोग उन्हें मजबूत बने रहने की सलाह दे रहे हैं और प्यार भेज रहे हैं।
वीडियो के आखिर में, उन्होंने अपनी मां के साथ बचपन की एक बातचीत को भी याद किया, जब उत्सुक फरिया ने अपनी मां से ‘अल्लाह’ शब्द का मतलब पूछा था। उन्होंने कहा कि ‘जब मैं बच्ची थी, तो मैंने अपनी मां से पूछा था, ‘अल्लाह’ शब्द क्या है? इसका क्या मतलब है? उन्होंने बस इतना कहा कि इसका मतलब रोशनी है। इसका मतलब है हर जगह, सब कुछ, एक ही समय में। आप हर जगह, सब कुछ, एक ही समय में मौजूद किसी चीज को कैसे अलग कर सकते हैं?’
एक्ट्रेस ने ‘आइस ब्रेकिंग विद आइजैक’ पॉडकास्ट में भी इस मुद्दे पर बात की थी। उन्होंने बताया कि मंदिर और पूजा की दूसरी जगहें हमेशा से उनके लिए पवित्र रही हैं क्योंकि वह एक मिली-जुली संस्कृति वाले परिवार में पली-बढ़ी है। फ़रिया ने कहा कि उन्होंने पहले कभी बोनालू का अनुभव नहीं किया था और इसमें शामिल होना चाहती थीं क्योंकि यह उस संस्कृति का हिस्सा था जिसमें वह बड़ी हुई थीं। उन्होंने बताया कि त्योहार के माहौल से वह गहराई से जुड़ी हुई महसूस करती थीं।
बोनालू का त्योहार क्या है?
बोनालू देवी महाकाली और उनके क्षेत्रीय रूपों, जैसे येल्लम्मा, को समर्पित एक पारंपरिक हिंदू लोक त्योहार है। यह त्योहार हर साल हिंदू महीने आषाढ़ (जुलाई-अगस्त) में मुख्य रूप से हैदराबाद, सिकंदराबाद और पूरे तेलंगाना में मनाया जाता है। इसे समुदाय की सेहत, सुरक्षा और बचाव के लिए आभार व्यक्त करने वाले त्योहार के तौर पर मनाया जाता है।
फरिया को ट्रोल क्यों किया गया?
फरिया 10 अगस्त, 2026 को हैदराबाद के पुराने शहर (ओल्ड सिटी) के मीरआलम मंडी में ऐतिहासिक श्री महाकालेश्वर अम्मावरी मंदिर में बोनालू के जश्न में शामिल हुई थीं। उन्होंने त्योहार की गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पारंपरिक ‘बंगारू बोनम’ उठाकर अपना बचपन का सपना भी पूरा किया। हालांकि कई लोगों ने तेलंगाना की संस्कृति और सबको साथ लेकर चलने की भावना को अपनाने के लिए एक्ट्रेस की तारीफ की, लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स के एक वर्ग ने उनके इसमें शामिल होने की आलोचना की क्योंकि उनका जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। इस आलोचना के बाद फारिया ने अपनी मिली-जुली सांस्कृतिक परवरिश और धर्म के बारे में अपनी निजी समझ के बारे में खुलकर बात की।