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Matsya Jayanti 2026 :  आज है भगवान विष्णु के प्रथम अवतार मत्स्य जयंती , करें श्रीहरि के इस दिव्य स्तोत्र का पाठ

By अनूप कुमार 
Updated Date

 Matsya Jayanti 2026 :  आज 21 मार्च 2026, शनिवार को पूरे भारत में श्रद्धा और भक्ति के साथ मत्स्य जयंती मनाई जा रही है। यह दिन भगवान भगवान विष्णु के प्रथम अवतार मत्स्य अवतार को समर्पित है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह पर्व न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि प्रकृति और जीवन के संरक्षण का संदेश भी देता है।  चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाए जाने वाले इस पर्व पर भक्त विष्णु के मछली रूप की पूजा करते हैं, जो वेदों और सृष्टि की रक्षा का प्रतीक है। इस दिन पवित्र उपवास, दान और पूजा से पापों का नाश व सुख-समृद्धि की प्राप्ति मानी जाती है। यह अवतार सृष्टि के विनाश (जल प्रलय) के समय वेदों, ऋषियों और मनु को बचाने के लिए हुआ था।  मान्यता है कि इस दिन व्रत, पूजा और दान करने से जीवन में सुख, समृद्धि और पापों से मुक्ति मिलती है।

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जीवन में सुख, समृद्धि और पापों से मुक्ति
हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब पृथ्वी पर प्रलय आने वाली थी, तब भगवान भगवान विष्णु ने मत्स्य (मछली) का रूप धारण किया था। इस अवतार के माध्यम से उन्होंने राजा सत्यव्रत (जो बाद में मनु कहलाए) को जीवन और सृष्टि के संरक्षण का मार्ग दिखाया। इस दिन को चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत, पूजा और दान करने से जीवन में सुख, समृद्धि और पापों से मुक्ति मिलती है।

भगवान विष्णु का आशीर्वाद
देश के विभिन्न हिस्सों में मत्स्य जयंती के अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिरों में पहुंचकर भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

मत्स्य अवतार कथा से सीख
हिन्दू धर्म में, मत्स्यावतार केवल एक धार्मिक कथा नहीं है। यह ज्ञान, धैर्य और जीवन की सुरक्षा का प्रतीक है। जल प्रलय, हयग्रीव की वेदों की चोरी और राजा मनु की रक्षा की कथा आज भी मानवता को सिखाती है कि संकट में बुद्धि और धर्म का पालन अनिवार्य है और जब-जब धर्म की हानि होगी उसकी रक्षा के लिए भगवान विष्णु अवतार लेंगे।

श्री हरि स्तोत्रम् 
जगज्जालपालं कचत्कण्ठमालं, शरच्चन्द्रभालं महादैत्यकालम्।
नभोनीलकायं दुरवारमायं, सुपद्मासहायं भजेऽहं भजेऽहम्।।
(अर्थ: जो जगत के रक्षक हैं, गले में माला धारण करते हैं, शरद ऋतु के चन्द्रमा के समान मुख वाले हैं, दैत्यों के काल हैं, आकाश के समान नीले रंग के शरीर वाले हैं, जिनकी माया को दूर करना कठिन है, और जो लक्ष्मी जी के साथ हैं, मैं उन भगवान विष्णु को बार-बार भजता हूँ )

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