Narak Nivaran Chaturdashi 2025 : सनातन धर्म में पाप – पुण्य और स्वर्ग – नर्क का बहुत महत्व है। इसका सीधा तात्पर्य ये है कि पुण्य के फलों से स्वर्ग मिलता है और पापों के प्रभाव से आत्मा नर्क भोगती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की 14वीं तिथि यानी चतुर्दशी को नरक निवारण चतुर्दशी का व्रत रखा जाता है।
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भगवान शंकर की पूजा करने से आयु में वृद्धि होती है
इसे माघ शिवरात्रि भी कहते हैं। इस व्रत का धार्मिक दृष्टि से काफी महत्व है। पुराणों के अनुसार इस तिथि पर भगवान शंकर की पूजा करने से आयु में वृद्धि होती है। स्वर्ग-नरक के फेर से मुक्ति मिलती है। इस दिन शिव का ध्यान करने से सिद्धियों की प्राप्ति होती है। इस व्रत में बेर और सेम का प्रसाद अर्पित करने का विधान है।
वज्र योग का शुभ संयोग
चांग के अनुसार उदया तिथि को देखते हुए मंगलवार 28 जनवरी को नरक निवारण चतुर्दशी का व्रत रखा जाएगा और शाम को 7:21 बजे के बाद व्रत का पारण किया जा सकेगा। नरक निवारण चतुर्दशी पर इस बार मंगलवार 28 जनवरी को पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र और वज्र योग का शुभ संयोग बन रहा है।
ब्राह्मण को घी और शहद का दान
पौराणिक मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से पूजा करने और व्रत रखने से नरक से मुक्ति मिलती है। इस दिन भगवान शिव को बेलपत्र और बेर जरूर चढ़ाना चाहिए, अगर उपवास करें तो व्रत का पारण बेर खाकर करना चाहिए, साथ ही इस दिन रुद्राभिषेक करने से भी बहुत लाभ प्राप्त होता है। इस दिन ब्राह्मण को घी और शहद का दान करने से रोगों से छुटकारा मिलता है। किसी के घर में कोई रोगी है तो वह इस अवसर पर यह उपाय कर सकते हैं।