ओडिशा में नए राज्यपाल ब्रज मोहन राम के एक बयान को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। राम ने राज्य में भाजपा के संगठन को और मजबूत करने की बात कही थी। इस पर विपक्षी बीजू जनता दल (BJD) ने आपत्ति जताते हुए कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से निष्पक्ष रहने की उम्मीद की जाती है, लेकिन उनका बयान इस पर सवाल खड़े करता है।
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BJP के एससी मोर्चे को सक्रिय करने की कही बात
एक समाचार एजेंसी को रांची में दिए इंटरव्यू के दौरान ब्रज मोहन राम ने कहा कि वह ओडिशा में भाजपा के अनुसूचित जाति (SC) मोर्चे को और सक्रिय बनाने के लिए काम करेंगे। उन्होंने बताया कि झारखंड में भाजपा के दलित मोर्चे के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम किया था।
राम ने कहा कि ओडिशा में भी पार्टी का एससी मोर्चा है और राज्यपाल का पद संभालने के बाद वह इसे और सक्रिय करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने भाजपा के लिए अधिक वोट हासिल करने की दिशा में प्रयास करने की बात भी कही।
BJD ने राज्यपाल की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
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राज्यपाल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजद के प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का यह कहना कि वह ओडिशा में भाजपा संगठन को मजबूत करने के लिए काम करेंगे, हैरान करने वाला है। मोहंती के मुताबिक, यह टिप्पणी संवैधानिक पद की निष्पक्षता के सिद्धांत के विपरीत है।
मोदी-शाह का जताया आभार
ब्रज मोहन राम ने खुद को भाजपा का समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ता बताया। उन्होंने राज्यपाल नियुक्त किए जाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताया।
राम ने यह भी कहा कि भाजपा ने उन्हें तीन बार चुनाव लड़ने के लिए टिकट नहीं दिया, लेकिन इसके बावजूद वह पार्टी के साथ बने रहे। उन्होंने दावा किया कि टिकट नहीं मिलने के बाद भी उन्होंने पार्टी के उम्मीदवारों की जीत के लिए काम किया। उनके बयान के बाद राज्यपाल के संवैधानिक दायित्वों और राजनीतिक भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है।