मुंबई। नवरात्र का त्योहार मां दुर्गा की आराधना के साथ-साथ नारी शक्ति, साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस खास मौके पर टेलीविजन अभिनेत्री ‘रश्मि देसाई’ और ‘तोरल रासपुत्रा’ से जुड़ी नवरात्र और बचपन की यादें काफी चर्चा में हैं। सांस्कृतिक उत्सव, त्योहारों से जुड़ी परंपराएं और परिवार के साथ बिताए पल किस तरह जीवन में खास जगह रखते हैं, यह इन सुनहरी यादों से समझा जा सकता है।
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‘रश्मि देसाई’ के लिए नवरात्र का क्या है खास महत्व?
गुजराती परिवार से संबंध रखने वाली रश्मि देसाई के लिए नवरात्र का त्योहार गरबा, डांडिया, पारंपरिक कपड़ों और पूजा-पाठ से जुड़ा रहा है। 2017 में प्रकाशित एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि नवरात्र के दौरान दोस्तों से मिलना, गरबा देखना और इसमें हिस्सा लेना उन्हें बेहद पसंद है। साथ ही उन्होंने ये भी बताया था कि बचपन में उनकी मां उन्हें गरबा और डांडिया के लिए खरीदारी कराने साथ ले जाती थीं।
इसके अलावा रश्मि ने अपनी पुरानी यादों (Nostalgia) में रंग-बिरंगे पारंपरिक कपड़े, आभूषण और नौ रातों तक गरबा खेलने के अनुभव का जिक्र किया था। उन्होंने बताया कि व्रत के दौरान उनकी मां उनके लिए व्रत में खाए जाने वाले खास व्यंजन भी बनाती थीं। रश्मि की इन यादों से ये पता चलता है कि त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं होते, बल्कि परिवार और बचपन से जुड़े भावनात्मक रिश्तों को भी और गहरा और मजबूत बनाते हैं।
‘तोरल रासपुत्रा’ और त्योहारों से जुड़ी यादें
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दर्शक टेलीविजन अभिनेत्री ‘तोरल रासपुत्रा’ को बालिका वधू जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों से पहचानते हैं। त्योहारों से जुड़ी उनकी यादों में भी परिवार और बचपन का खास स्थान रहा है। हालांकि, नवरात्र पर उनके द्वारा दिए गए किसी हालिया बयान में शक्ति के अर्थ या बचपन की विशेष यादों का पूरा और स्वतंत्र रूप से सत्यापित विवरण उपलब्ध नहीं मिला है। इसलिए उनके नाम से कोई खास उद्धरण या व्यक्तिगत अनुभव जोड़ना ठीक नहीं होगा।
आखिर शक्ति का सही मतलब क्या है?
नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता में देवी दुर्गा को साहस, शक्ति और बुराई के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। वहीं आज के संदर्भ में शक्ति का अर्थ केवल शारीरिक ताकत नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता, कठिन परिस्थितियों का सामना करने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की क्षमता भी है।
कुल मिलाकर नवरात्र का संदेश यही है कि महिलाओं का सम्मान केवल त्योहारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनके फैसलों, सपनों और स्वतंत्रता का सम्मान दैनिक जिंदगी में भी बेहद जरूरी है।