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पवन खेड़ा की जमानत पर अभिषेक मनु सिंघवी, ‘मोदी सरकार हर दिन करती है संविधान पर हमला, लेकिन आज संवैधानिक मूल्य और प्रावधान जीत गए’

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी (Abhishek Manu Singhvi)  ने शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस कर पवन खेड़ा (Pawan Khera) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  से मिली अग्रिम जमानत को कानूनी मर्यादा की जीत बताया है। सिंघवी ने कहा कि मजिस्ट्रेट कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  तक का यह कानूनी सफर बताता है कि सत्ता का उपयोग केवल विपक्षी नेताओं को परेशान करने के लिए किया जा रहा है।

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उन्होंने कहा कि जिस प्रेस कॉन्फ्रेंस को आधार बनाकर मानहानि का दावा किया गया, उसमें सभी दस्तावेज पूरी पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक पटल पर रखे गए थे। सिंघवी के अनुसार, जब मामला केवल प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का हो और आरोपी जांच में सहयोग के लिए तैयार हो, तब गिरफ्तारी करना केवल राजनीतिक स्कोर सेट करने और व्यक्ति को अपमानित करने का एक जरिया मात्र है।

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आज हम यहां अपनी आत्मप्रशंसा करने नहीं आए हैं। हम यहां कुछ मूल सिद्धांतों की बात करने आए हैं, जिनमें से कुछ मुख्य हैं कि जब मुद्दा आजादी का हो तो न्याय व्यवस्था लोगों की संरक्षक होती है। हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि हम कानून के नीचे हैं। जब हम धर्म की रक्षा करते हैं तो धर्म हमारी रक्षा करता है।

जब भी ऐसे मामलों में मानहानि का आरोप होता है तो उसमें सवाल उठता है कि क्या गिरफ्तारी के बिना पूछताछ नहीं हो सकती है?

इस मामले की कहानी कामरूप मजिस्ट्रेट से शुरू हुई और फिर तेलंगाना हाईकोर्ट होते हुए सुप्रीम कोर्ट आई। फिर मामला गुवाहाटी हाईकोर्ट पहुंचा और आज सुप्रीम कोर्ट से एक फैसला आया है। जब भी ऐसे मामलों में मानहानि का आरोप होता है तो उसमें सवाल उठता है कि क्या गिरफ्तारी के बिना पूछताछ नहीं हो सकती है? लेकिन इस मामले में करीब 60 पुलिसवालों को एक व्यक्ति के घर पर भेज दिया गया, जिसका समाज और राजनीतिक दल में बड़ा नाम है। भारी संख्या में पुलिस भेजने का कारण सिर्फ डराना और उत्पीड़न करना था।

असम के मुख्यमंत्री को सोचना चाहिए कि क्या एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को ये शोभा देता है?

अभिषेक मनु सिंघवी (Abhishek Manu Singhvi)  ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री को तीन पन्नों में कोट किया है। वहीं, ऐसी कई बातें हैं जो न न्यायालय कोट कर सकती है और न मैं बोल सकता हूं। ऐसे में असम के मुख्यमंत्री को सोचना चाहिए कि क्या एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को ये शोभा देता है? मैं चाहता हूं कि असम के मुख्यमंत्री इस बारे में गंभीरतापूर्वक विचार कर खेद व्यक्त करें।

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सिंघवी ने कहा कि 5 अप्रैल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दो दिन बाद असम सरकार की मशीनरी ने पूरी ताकत के साथ एक NBW याचिका डाली, जिसे ख़ारिज कर दिया गया था। जिस निर्णय के खिलाफ हम सुप्रीम कोर्ट गए थे, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है, उसमें ऐसे प्रावधानों का जिक्र है, जो शिकायतकर्ता, याचक और जांच एजेंसी ने नहीं कही है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि हम भूल जाते हैं कि अंतरिम जमानत के मामले में जब तक दोष सिद्ध न हो जाए, तब तक किसी को दोषी नहीं माना जा सकता है।

इस मामले में कई प्रकार के पहलुओं को डाल दिया गया, ताकि यह मानहानि से एक अलग केस बन जाए। इसमें 9 प्रावधानों का इस्तेमाल किया गया था, जिसे हमने साबित किया है- ये सभी प्रावधान जमानती हैं। उन्होंने कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हर नागरिक को अभिव्यक्ति की आजादी है और अगर राजनीतिक अभियान के दौरान एक राजनीतिक बयान को इतना बड़ा मुद्दा बनाया जाएगा तो ये Article 19(1)(a) को खतरा होगा। अभिषेक मनु सिंघवी (Abhishek Manu Singhvi)  ने कहा कि मैं इस निर्णय के लिए सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देना चाहता हूं और इस फैसले पर कांग्रेस पार्टी समेत सभी लोगों को बधाई देता हूं।

आज संविधान की जीत हुई है

कांग्रेस महासचिव (संचार) ने कहा कि आज संविधान की जीत हुई है। मोदी सरकार हर दिन संविधान पर हमला करती है, लेकिन आज संवैधानिक मूल्य और प्रावधान जीत गए हैं। हम सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत करते हैं।

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