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One Nation One Time : अब भारत के लोगों को बदलनी पड़ेगी अपनी घड़ी की सेटिंग! सरकार ने बदल दिया समय का सिस्टम

By santosh singh 
Updated Date

नई दिल्ली। देश में इस वक्त ‘वन नेशन, वन टाइम’ (One Nation, One Time) की चर्चा जोरों पर है। सरकार ने समय के सिस्टम को बदलने के लिए एक नोटिफिकेशन जारी किया है। इसका मकसद पूरे देश के लिए एक सटीक और सिंगल टाइम स्टैंडर्ड को मजबूत बनाना है यानी पूरे भारत में एक ही सही समय हो। इसमें जगह-टू-जगह कोई फर्क न हो। अभी भारत में इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (IST) का पालन किया जाता है।

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बीते 27 अगस्त को उपभोक्ता मामले विभाग (Department of Consumer Affairs) के तरफ से जारी इस नोटिफिकेशन Legal Metrology (Indian Standard Time) Rules, 2026 में कई बातों का जिक्र किया गया है। ये नियम गजट में छपने के 180 दिन बाद लागू होंगे। इसके बाद कानूनी, सरकारी, बिजनेस और ऑफिशियल कामों के लिए सिर्फ यही इंडियन स्टैंडर्ड टाइम मान्य होगा।

आप इसे अब इस तरह भी समझ सकते हैं कि जैसे ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’, ‘वन नेशन, वन टैक्स’ की बात होती है, वैसे ही अब ‘वन नेशन, वन टाइम’ की बात होगी। पूरे देश की घड़ी एक ही सही सोर्स से चलेगी, ताकि समय में कोई गड़बड़ी न रहे।

वन नेशन, वन टाइम की जरूरत क्यों?

अभी भारत में इंडियन स्टैंडर्ड टाइम का पालन किया जाता है, लेकिन कई जगहों पर (मोबाइल, रेलवे, बैंक, सरकारी दफ्तर, कंप्यूटर) समय अलग-अलग सर्वरों से आता है। कभी गूगल का, कभी किसी विदेशी सर्वर का। इससे थोड़ा-बहुत फर्क पड़ता है। सरकार इसी फर्क को दूर करना चाहती है। सरकार चाहती है कि देश की सभी घड़ियां, मोबाइल, कंप्यूटर, नेटवर्क और डिजिटल डिवाइस एक ही सही समय दिखाए।

दरअसल, जब साइबर अपराधों या आतंकी गतिविधियों की जांच होती है, तो अलग-अलग डिवाइस में कुछ सेकंड या मिनट का अंतर होने के कारण घटनाओं का सटीक समय मैच करना मुश्किल हो जाता है। एक समय होने से जांच आसान होगी। बैंकिंग लेनदेन, शेयर बाजार और रेलवे/हवाई जहाज के संचालन में एक-एक सेकंड का महत्व होता है। समय का अंतर होने से बड़ी गड़बड़ी हो सकती है।

क्या बदल जाएगा हमारी घड़ी का समय?

ऐसा बिल्कुल भी नहीं होगा। घड़ी में जो समय अभी हो रहा है, वही रहेगा। बस डिजिटल घड़ियां और मोबाइल नेटवर्क बैकएंड में सीधे भारत के अपने आधिकारिक परमाणु समय से जुड़ जाएंगे, जिससे पूरे देश में नैनो सेकंड तक का समय बिल्कुल एक समान होगा।

विदेशी सोर्स पर निर्भरता होगी कम

भारतीय संस्थानों और सरकारी प्रयोगशालाओं के जरिए अपना मजबूत नेटवर्क तैयार कर रही है, जिससे सही समय यानी IST हर जगह पहुंचे। इस समय कई प्रणालियां समय के लिए अमेरिकी GPS या अन्य विदेशी स्रोतों पर निर्भर हैं। भारत अपने स्वदेशी ‘नाविक’ (NavIC) नेविगेशन सिस्टम और NPL के जरिए आत्मनिर्भर बनना चाहता है।ये सिस्टम भरोसेमंद और सुरक्षित होंगे।

किन सेक्टरों में मिलेगी सहायता?

बैंकिंग और डिजिटल लेनदेन की सटीक टाइम-स्टैम्पिंग।

रेलवे, एयरपोर्ट्स और अन्य ट्रांसपोर्ट सिस्टम के बीच कोऑर्डिनेशन।

दूरसंचार और इंटरनेट नेटवर्क का विश्वसनीय संचालन।

पावर सिस्टम में सटीक टाइमिंग का पालन।

सरकारी और कानूनी रिकॉर्ड का रखरखाव।

इमरजेंसी और अन्य टाइम सेंसेटिव टाइमिंग का समन्वय।

‘व्हाइट रैबिट’ तकनीक का डेमो

‘वन नेशन, वन टाइम’ पहल के तहत जुलाई 2026 में बेंगलुरु के (RRSL) लैब में ‘व्हाइट रैबिट’ नाम की नई तकनीक का प्रदर्शन किया गया। इस तकनीक से सही भारतीय समय (IST) को सुरक्षित तरीके से दूर-दूर तक पहुंचाया जा सकता है। इस सिस्टम ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों (बैंकिंग, दूरसंचार, बिजली, परिवहन और डिजिटल गवर्नेंस) में सफलतापूर्वक समय पहुंचाकर दिखाया।

इसके साथ ही CSIR-NPL, ISRO, SEBI, NSE, BSNL और दूसरे संस्थानों के साथ मिलकर बेंगलुरु से चेन्नई (NSE) तक सुरक्षित IST भेजने का भी सफल प्रदर्शन किया गया।

180 दिन का समय क्यों दिया गया?

नियम लागू होने से पहले 180 दिन का समय दिया गया है, ताकि कंपनियां और संस्थाएं अपनी मौजूदा सिस्टम जांच सकें। जरूरी तकनीकी बदलाव कर सकें और नई व्यवस्था के लिए तैयार हो सकें।

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