अखिलेश यादव की तरफ से एक पत्र जारी किया गया है, जिसमें लिखा गया है कि, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी ने हमें संविधान दिया। उसी संविधान ने हर गरीब, पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक, और महिला को बराबरी का अधिकार दिया। बाबा साहेब की प्रतिमा केवल पत्थर या धातु की मूर्ति नहीं है, बल्कि यह हमारे सम्मान, अधिकार, संविधान और सामाजिक न्याय का प्रतीक है।
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि, 2017 से अब तक प्रदेश के 72 जिलों में बाबा साहेब की 151 से अधिक प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त करने की घटनाएं सामने आई हैं। समाजवादी पार्टी की तरफ से इसको लेकर एक चार्ट शेयर किया गया है, जिसमें किस जिले में कितनी घटनाएं हुईं उसका जिक्र है।
इसके साथ ही, अखिलेश यादव की तरफ से एक पत्र जारी किया गया है, जिसमें लिखा गया है कि, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी ने हमें संविधान दिया। उसी संविधान ने हर गरीब, पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक, और महिला को बराबरी का अधिकार दिया। बाबा साहेब की प्रतिमा केवल पत्थर या धातु की मूर्ति नहीं है, बल्कि यह हमारे सम्मान, अधिकार, संविधान और सामाजिक न्याय का प्रतीक है।
PDA ऑडिट | अंक–7
भाजपा सरकार में 151+ बाबा साहेब की मूर्तियाँ खंडित pic.twitter.com/KRU2IO6S1f— Samajwadi Party (@samajwadiparty) September 20, 2026
लेकिन भाजपा सरकार में बाबा साहेब की प्रतिमाओं को लगातार सामंतवादी तत्वों द्वारा निशाना बनाया जा रहा है। 2017 से अब तक प्रदेश के 72 जिलों में बाबा साहेब की 151 से अधिक प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त करने की घटनाएं सामने आई हैं। यानी हर साल औसतन 15 से ज्यादा प्रतिमाएं खंडित की गड़ी लेकिन 85% से अधिक मामलों में सत्ता-संरक्षित सामंतवादी अराजक तत्वों पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
अखिलेश यादव ने पत्र में आगे लिखा कि, समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता बाबा साहेब के सम्मान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। वे गांव-गांव जाकर लोगों से मिलेंगे और ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को उजागर करेंगे। Creator Studio हम उत्तर प्रदेश की जनता से अपील करते हैं कि बाबा साहेब के सम्मान, संविधान की रक्षा और सामाजिक न्याय की लड़ाई में चुप न रहें। अपने गांव, कस्बे और शहर में ऐसी हर घटना का विरोध करें, सवाल पूछें और 2027 के चुनाव में उन सामंतवादी ताकतों को जवाब दें जो बाबा साहेब के नाम पर राजनीति तो करती हैं, लेकिन उनके सम्मान की रक्षा नहीं कर पातीं।