नई दिल्ली। पाकिस्तानी सेना (Pakistani Army) ने पहली बार संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के तरफ से घोषित आतंकवादियों हाफिज सईद और मसूद अजहर की सुरक्षा के लिए सीधे तौर पर युद्ध लड़ा, इस बात को एक सार्वजनिक मंच से स्वीकार कर पाकिस्तान के प्रमुख नेता शाहिर सियालवी (Prominent Pakistani Leader Shahir Sialvi) ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इसका खुलासा एक कार्यक्रम के दौरान किया गया था जो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) की पहली बरसी पर आयोजित की गई थी।
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इस खुलासे में सियालवी ने दावा किया कि जब भारतीय सेना ने मुरीदके यानि लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) के मुख्यालय और बहावलपुर यानि जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) के मुख्यालय में सटीक हमलें किए तब पाकिस्तान की सेना ने इन आतंकी ठिकानों को बचाने के लिए जबाबी कार्रवाई भी की थी। इस खुलासे में यह भी पता चला है कि इन हमलों में मारे गए आतंकीयों का अंतीम संस्कार सैन्य सम्मान के साथ किया गया था। इन आतंकियों को मौलवियों के बजाय पाकिस्तानी सेना के सैन्य पादरियों (Military Chaplains) द्वारा दफनाया गया। इसके अलावा वहां के वर्दीधारी सैनिकों ने उन मारे गए आतंकवादियों को स्वतंत्रता सेनानी बताते हुए गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया था।
खबरों के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना ने आतंकी हाफिज सईद और मसूद अजहर को अपने सुरक्षित ठिकानों (Corps Headquarters) में स्थानांतरित कर दिया है जहां उन्हें विशेष सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है। 7 मई 2025 को जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पीओके और पाकिस्तान में नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था तब यह सैन्य टकराव शुरू हुआ था। इस भारतीय हमलों में 100 से अधिक आतंकवादी और मसूद अजहर के परिवार के 14 सदस्य मारे गए थे।
पाकिस्तान के डीजीएमओ (DGMO) की विनती पर 10 मई 2025 को दोनों देशों के बीच भारी नुकसान के बाद युद्धविराम हुआ था। हाल ही भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि पाकिस्तान चाहता है कि शांति कायम रहे तो इन आतंकियों को शांतिपूर्वक भारत के हवाले कर दे। इसके अलावा उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि आतंकी गतिविधियां दुबारा हुई, तो मजबूरन हमें’ऑपरेशन सिंदूर’को फिर से शुरू करना पड़ सकता है।
रिपोर्ट : सुशील कुमार साह