नई दिल्ली। मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन (Pump-action gun) के इस्तेमाल को लेकर CRPF ने अपनी आंतरिक समीक्षा रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है कि हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए इस कदम में सभी मानक संचालन प्रक्रियाओं (Standard Operating Procedure) और दंगा-रोधी नियमों का पूरी तरह से पालन किया गया था।
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चरणबद्ध तरीके से किया गया बल प्रयोग
CRPF की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाबलों ने बल प्रयोग के निर्धारित क्रम का सख्ती से पालन किया। साथ ही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सबसे पहले लाउडस्पीकर के जरिए चेतावनी जारी की गई। जब इसके बाद भी स्थिति काबू में नहीं आई तब आंसू गैस के गोले दागे गए और लाठीचार्ज किया गया। जब ये सभी शुरुआती उपाय विफल हो गए, तब अंतिम विकल्प के रूप में पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया।
दिल्ली पुलिस से ली गई थी लिखित मंजूरी
समीक्षा रिपोर्ट में साफ किया गया है कि दंगा-रोधी इकाई ‘Rapid Action Force’ ने यह कदम कानून के दायरे में रहकर उठाया था। पैलेट गन चलाने से पहले दिल्ली पुलिस के डीसीपी/एसीपी स्तर के अधिकारी से लिखित अनुमति ली गई थी।
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सुरक्षाबलों पर हमले में 47 जवान घायल
रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ ‘प्रेरित तत्व’ (Inspired element) मौजूद थे, जिन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को टारगेट किया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, भीड़ की तरफ से भी सुरक्षाकर्मियों पर पत्थरों और लोहे की रेलिंग से सीधे हमले किए गए। बताया जा रहा है कि इस हिंसक झड़प में RAF के 47 जवान घायल हो गए, जिनमें से 6 जवानों के सिर में गंभीर चोटें आई। वहीं, पैलेट गन के छर्रे लगने से तीन से पांच प्रदर्शनकारियों के घायल होने की पुष्टि की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखे जाएंगे तथ्य
CRPF के महानिदेशक ( Director General) के मुताबिक, यह पूरा मामला वर्तमान में माननीय न्यायालय के विचार के अधीन है। बल की ओर से इस आंतरिक समीक्षा के सभी निष्कर्षों और तथ्यों को सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा।