Pitru Paksha Pindadaan : सनातन धर्म में पितृपक्ष का बहुत महत्व है। इस विशेष अवधि के दौरान तिथि के अनुसार दिवंगत हो चुके पितृगणों की आत्मा के शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण, और पिंडदान के साथ दान करने युगों पुरानी परंपरा है। शास्त्रों के अनुसार, मनुष्य जन्म से ही विभिन्न ऋणों या दायित्वों के अधीन होता है, और इनमें मुख्य रूप से देव ऋण, पितृ ऋण, और ऋषि ऋण शामिल हैं। इन ऋणों को चुकाने के लिए अलग-अलग कर्तव्य और कार्य बताए गए हैं। पितृ पक्ष में पिंडदान के माध्यम से पितरों को सम्मान देने और उनका ऋण चुकाने से संबंधित है।
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पितृपक्ष के दौरान पिंडदान करने के लिए पवित्र स्नान, कुश से जनेऊ बनाकर जल चढ़ाना, पिंड दान, और ब्राह्मणों को भोजन कराना शामिल है। पितरों के नाम से जल अर्पित करने के लिए दक्षिण दिशा की ओर मुख करना चाहिए। पितृ दोष से मुक्ति के लिए पितृ स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है। इस दौरान प्याज, लहसुन से परहेज, और तुलसी का प्रयोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
पितृपक्ष की शुरुआत
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल पितृपक्ष की शुरुआत 07 सितंबर 2025 से होगी। साथ ही इसकी समाप्ति 21 सितंबर 2025 को होगी।
पितरों का पिंडदान करने के लिए कुछ शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध-कर्म में पके हुए चावल, दूध और तिल को मिश्रित करके पिंड बनाए जाते हैं और उसे सपिंडीकरण कहते हैं।
पौराणिक मान्यता है कि समय अनुसार श्राद्ध करने से कुल में कोई दुखी नहीं रहता। पितरों की पूजा से मनुष्य आयु, पुत्र, यश, कीर्ति, स्वर्ग, पुष्टि, बल, श्री, सुख-सौभाग्य और धन-धान्य प्राप्त करता है।