भारत त्यौहारों और अनूठी परंपराओं का देश है। यहाँ हर त्यौहार के पीछे कोई न कोई धार्मिक, पौराणिक या सामाजिक कारण छिपा होता है। ऐसा ही एक अनोखा रिवाज़ नाग पंचमी (Nag Panchami) के दिन देखने को मिलता है, जिसे 'गुड़िया पीटना' या 'गुड़िया का त्यौहार' कहा जाता है।
लखनऊ। भारत त्यौहारों और अनूठी परंपराओं का देश है। यहाँ हर त्यौहार के पीछे कोई न कोई धार्मिक, पौराणिक या सामाजिक कारण छिपा होता है। ऐसा ही एक अनोखा रिवाज़ नाग पंचमी (Nag Panchami) के दिन देखने को मिलता है, जिसे ‘गुड़िया पीटना’ या ‘गुड़िया का त्यौहार’ कहा जाता है। उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में नाग पंचमी (Nag Panchami) के दिन कपड़े की बनी गुड़िया को डंडों से पीटने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि इस परंपरा के पीछे क्या कहानियाँ और कारण हैं।
नागराज और तक्षक से जुड़ी पौराणिक कथा
इस परंपरा के पीछे सबसे प्रसिद्ध कथा महाभारत काल और राजा परीक्षित से जुड़ी है। तक्षक नाग की दुश्मनी पौराणिक कथाओं के अनुसार, तक्षक नाग के काटने से राजा परीक्षित की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उनके पुत्र जन्मेजय ने सर्प यज्ञ कराया था। माना जाता है कि उस समय तक्षक नाग ने अपना रूप बदलकर एक भेस में छुपने की कोशिश की थी, लेकिन एक लड़की ने उसका भेद सबके सामने खोल दिया था। गुस्से में आकर नाग ने उस लड़की को डस लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। ऐसा कहा जाता है कि उसी लड़की की याद में कपड़े की गुड़िया बनाई जाती है और नाग पंचमी के दिन ‘नाग के प्रतीक’ या ‘उस घटना के स्मरण’ में लड़के उन गुड़ियों को डंडों से पीटते हैं, ताकि उस घटना का विरोध किया जा सके।
सामाजिक और पारम्परिक कारण
धार्मिक कथाओं के अलावा, इस त्यौहार का एक सुंदर सामाजिक पहलू भी है,भाई-बहन का प्रेम: इस दिन घर की बेटियां और बहनें पुराने कपड़ों से रंग-बिरंगी गुड़िया बनाती हैं। घर में पड़े पुराने कपड़ों का इस्तमाल करके गुड़िया बनाना पुरानी चीज़ों को नया रूप देने की कला को भी दर्शाता है। लड़कियाँ इन गुड़ियों को चौराहे, तालाब या नदी के किनारे ले जाती हैं। वहाँ लड़के (भाई) उन गुड़ियों को डंडों से पीटते हैं। इसके बाद गुड़ियों को पानी में विसर्जित कर दिया जाता है। विसर्जन के बाद भाई अपनी बहनों को उपहार (गिफ्ट), पैसे या मिठाई देते हैं। इस दिन चना, घुघरी और सेवइयां विशेष रूप से बनाई और बांटी जाती हैं।
वैज्ञानिक और मौसमी नज़रिया
नाग पंचमी (Nag Panchami) का त्यौहार सावन (मानसून) के महीने में आता है। बरसात के मौसम में चारों तरफ पानी भर जाता है और जहरीले जीव-जंतु जैसे सांप, बिच्छू आदि बिलों से बाहर निकल आते हैं। पुराने ज़माने में जब मनोरंजन के साधन सीमित थे, तब यह त्यौहार बच्चों और युवाओं के लिए एक-दूसरे से मिलने और खुशी मनाने का एक माध्यम बनता था। इस दिन मेला लगता बच्चे मेले का भरपूर आनंद उठाते है। मेले मे स्वादिस्ट मिठाईयां भिभ्न्नि प्रकार के पकवान झूला झूलती कन्याए कजरी गीत गाती महिलाए इस त्योहार मे जान डाल देती है।
नाग पंचमी (Nag Panchami) पर गुड़िया पीटने की यह परंपरा भले ही सुनने में थोड़ी अजीब लगे, लेकिन यह हमारी लोक संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। यह परंपरा जहाँ एक तरफ पौराणिक इतिहास से जुड़ी है, वहीं दूसरी तरफ भाई-बहन के रिश्ते में मिठास और समाज में खुशियां बांटने का काम करती है।
रिपोर्ट : दीपांजली मिश्रा