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Radha Ashtami Asht Sakhiyon 2026 : राधा रानी की अष्ट सखियों के रहस्य और उनके मंदिर ,

By अनूप कुमार 
Updated Date

Radha Rani Asht Sakhiyon : ब्रज और वृंदावन की भक्ति परंपरा में अष्ट सखियों का स्मरण किए बिना राधा-कृष्ण की आराधना अधूरी मानी जाती है। निष्काम सेवा और समर्पण का संदेश देने वाली इन दिव्य सखियों की महिमा राधा अष्टमी के पावन अवसर पर हर भक्त को जाननी चाहिए। तो आइए जानते हैं उन सखियों के बारे में।

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गोलोक और ब्रज में राधा रानी की सेवा के लिए आठ मुख्य सखियां हैं। रहस्य की बात यह है कि ये सखियां राधा जी से अलग नहीं हैं। अध्यात्म के अनुसार, राधा रानी ने कृष्ण की विभिन्न प्रकार से सेवा करने के लिए अपने ही शरीर से आठ रूप प्रकट किए, जिन्हें अष्ट सखी कहा जाता है।

ये सखियां दो समूहों में बंटी हैं
वामा समूह (तेज स्वभाव वाली): ललिता, विशाखा, चित्रा और चम्पकलता। ये कृष्ण से राधा जी के मान (रूठने) को बढ़ावा देती हैं।

दक्षिणा समूह (शांत स्वभाव वाली): रंगदेवी, सुदेवी, तुंगविद्या और इन्दुलेखा। ये हमेशा राधा-कृष्ण को मिलाने का प्रयास करती हैं।

अष्ट सखियों की लीडर ललिता जी हैं। वह स्वभाव से थोड़ी उग्र हैं और कृष्ण की गलतियों पर उन्हें डांटने से भी नहीं चूकतीं। उनका रहस्य यह है कि द्वापर युग की ललिता जी ही कलयुग में स्वामी हरिदास के रूप में प्रकट हुईं, जिन्होंने बांके बिहारी जी को प्रकट किया था।

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दूसरी मुख्य सखी हैं विशाखा जी। उनका जन्म राधा जी के साथ एक ही पल में हुआ था, इसलिए उनका रूप और रंग बिल्कुल राधा जी जैसा ही है। कलयुग में वे श्री चैतन्य महाप्रभु के परम मित्र रामानंद राय के रूप में आईं।

कला और विधाओं की देवियां 
बाकी छह सखियों के पास ऐसी अद्भुत कलाएं हैं जो ब्रह्मांड में किसी के पास नहीं हैं:

चित्रलेखा (चित्रा): ये बिना देखे सिर्फ मन के भाव समझकर किसी का भी हूबहू चित्र बना सकती हैं। वे इशारों की भाषा (सांकेतिक भाषा) की विशेषज्ञ हैं।

चम्पकलता: ये रसोई कला में माहिर हैं और कृष्ण के लिए ऐसे भोजन बनाती हैं जो अमृत से भी मीठे होते हैं।

तुंगविद्या: ये संगीत और नृत्य की देवी हैं। जब ये वीणा बजाती हैं, तो यमुना जी का पानी भी ठहर जाता है।

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इन्दुलेखा: ये रत्नों की पारखी हैं और राधा-कृष्ण के गुप्त संदेशों को लाने-ले जाने का काम करती हैं।

आठवीं और नौवीं सखियां जुड़वां बहनों की तरह हैं—रंगदेवी और सुदेवी।

रंगदेवी जी राधा जी के पैरों में महावर (मेहंदी) लगाती हैं और कृष्ण को रिझाने के लिए सुगंधित इत्र तैयार करती हैं।

सुदेवी जी राधा जी के केश (बाल) संवारती हैं और उन्हें पानी पिलाने की सेवा करती हैं।

सबसे बड़ा रहस्य: अष्ट सखियों का केवल एक ही लक्ष्य है—राधा-कृष्ण का मिलन। वे कभी खुद कृष्ण के साथ एकांत नहीं चाहतीं, बल्कि राधा जी को कृष्ण से मिलाने में ही परम आनंद पाती हैं। ब्रज के संतों के अनुसार, राधा-कृष्ण की कृपा पाने के लिए पहले इन अष्ट सखियों की अनुमति और कृपा होना बहुत जरूरी है।

श्री राधा रानी की इन अष्ट सखियों के मंदिर उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र (मथुरा-बरसाना के पास) में स्थित हैं। मान्यता है कि जिन गांवों में इन सखियों का जन्म हुआ था, वहीं आज इनके प्राचीन और दिव्य मंदिर बने हुए हैं।

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‘अष्टसखी मंदिर’, वृंदावन
यदि आप इन सभी अलग-अलग गांवों में नहीं जा सकते, तो वृंदावन में श्री बांके बिहारी मंदिर के पास एक ऐतिहासिक ‘अष्टसखी कुंज मंदिर’ (राधा रास बिहारी अष्टसखी मंदिर) भी है। इस एक ही मंदिर में राधा-कृष्ण के साथ उनकी साक्षात् आठों सखियों की मूर्तियां विराजमान हैं।
जय श्री राधे

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