Aavimukteshwaranand Controversy: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज (Shankaracharya Swami Avimukteshwarananda Saraswati Maharaj) विवादों में घिरे हुए हैं। बटुकों ने यौन शोषण (Sexual Abuse) का आरोप लगाते हुए प्रयागराज में केस दर्ज कराया है। मेडिकल परीक्षण (Medical Examination) में भी यौन उत्पीड़न (Sexual harassment) की पुष्टि हो गई है। अविमुक्तेश्वरानंद पर अब गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। ऐसे में वो और उनके शिष्य मुकुंदानंद ने गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) का रुख किया है। अब देखना होगा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) आज क्या फैसला सुनाती है?
पढ़ें :- शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई कल, यौन उत्पीड़न का दर्ज है केस
कल Allahabad High Court में शंकराचार्य जी की सुनवाई है। शंकराचार्य का पद किसी व्यक्ति तक सीमित नहीं होता है ये चार वेदों की जीवित परंपरा का सबसे उच्च आध्यात्मिक स्थान है। इस पद की मर्यादा सिर्फ एक पीठ या मठ की नहीं बल्कि पूरे सनातन समाज की पहचान है।
माघ मेला जैसे पवित्र अवसर के… pic.twitter.com/voULR7ivMb
— Raghavi Kumari (@RaghaviBhadri) February 26, 2026
पढ़ें :- गौ हत्यारे का इतना नीच प्रहार होगा, इसकी कल्पना नहीं थी , FIR के बाद शंकराचार्य का बड़ा बयान
इस बीच, कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की बेटी राघवी कुमारी ने ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के समर्थन में एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने इसे सनातन धर्म को बदनाम करने की साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का पद वेदों की सर्वोच्च आध्यात्मिक परंपरा है और इस पर आघात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राघवी कुमारी ने लिखा कि कल Allahabad High Court में शंकराचार्य जी की सुनवाई है। शंकराचार्य का पद किसी व्यक्ति तक सीमित नहीं होता है ये चार वेदों की जीवित परंपरा का सबसे उच्च आध्यात्मिक स्थान है। इस पद की मर्यादा सिर्फ एक पीठ या मठ की नहीं बल्कि पूरे सनातन समाज की पहचान है। उन्होंने लिखा कि माघ मेला जैसे पवित्र अवसर के दौरान जो विवाद खड़े हुए, उने बहुत भक्तों को बेहद दुख दिया है । राज्य की जिम्मेदारी सिर्फ कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं होती, धार्मिक भावनाओं का सम्मान और सामाजिक संतुलन बनाना भी सरकार का कर्तव्य होता है।
शंकराचार्य पर लगाए गए तथाकथित “आरोप” केवल एक व्यक्ति को निशाना बनाने का प्रयास नहीं, बल्कि उस सनातन आध्यात्मिक परंपरा को कमजोर करने की कोशिश हैं जिसकी नींव आदि शंकराचार्य ने रखी थी। एप्स राघवी कुमारी ने लिखा कि सदियों से वेदों की ज्योति जलाने वाली इस परंपरा को बदनाम करने की हर कोशिश पहले भी असफल हुई है और आगे भी होगी। आस्था पर आघात स्वीकार नहीं। सत्य ही अंतिम विजय है।न्यायालय पे विश्वास है। हर हर महादेव।