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बिहार विधान परिषद के नए सभापति बने रामबचन राय, अवधेश नारायण सिंह ने दिया इस्तीफा

By santosh singh 
Updated Date

पटना। बिहार विधान परिषद (Bihar Legislative Council) के सभापति अवधेश नारायण सिंह (BJP MLC) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद अब रामबचन राय (Rambachan Rai) बिहार विधान परिषद (Bihar Legislative Council) के नए सभापति बनाये गए हैं। इसके साथ ही अब बिहार विधान परिषद (Bihar Legislative Council)  के नए सभापति जदयू कोटे से बनाए गए हैं। वहीं इस्तीफा देने से पहले अवधेश नारायण सिंह (Awadhesh Narayan Singh) ने कहा था कि मैंने अपना त्यागपत्र इनको सौंप दिया है। भाजपा ने हमें जिम्मेदारी दी मैंने उसको अच्छे से निभाया। रामबचन बाबू को यह पद मिला है इस बात को लेकर हम काफी खुश हैं। वहीं बिहार विधान परिषद (Bihar Legislative Council) के नए सभापति रामबचन राय (Rambachan Rai) ने कहा कि हमें जो काम मिल जाता है मैं उस काम को करता हूं, मैं कभी मांगता नहीं हूं, नई जिम्मेदारी मिली है, मैं धन्यवाद देता हूं।

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अवधेश नारायण सिंह 2024 में बने थे सभापति

दरअसल, बीजेपी के सीनियर नेता अवधेश नारायण सिंह (Awadhesh Narayan Singh)  ने सोमवार को बिहार विधान परिषद के सभापति पद से इस्तीफा दे दिया। कहा जा रहा है कि यह उनकी पार्टी और सहयोगी JD(U) के बीच सत्ता-साझेदारी की व्यवस्था का हिस्सा है। विधान परिषद सचिवालय के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने बताया कि अवधेश नारायण सिंह को जून 2024 में इस पद पर नियुक्त किया गया था। हालांकि अब उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने JD(U) के देवेश चंद्र ठाकुर की जगह ली थी, जिन्होंने सीतामढ़ी से लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद यह पद छोड़ दिया था।

कब-कब सभापति रहे अवधेश नारायण सिंह?

राज्य के पूर्व मंत्री अवधेश नारायण सिंह (Awadhesh Narayan Singh) के नीतीश कुमार के साथ बहुत अच्छे संबंध थे। नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने इस साल की शुरुआत में बीजेपी के सम्राट चौधरी के लिए रास्ता बनाने के लिए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। गया ग्रेजुएट्स निर्वाचन क्षेत्र से कई बार MLC रहे अवधेश नारायण सिंह (Awadhesh Narayan Singh)  को पहली बार 2012 में उच्च सदन का सभापति चुना गया था और वे 2017 तक इस पद पर रहे। वे 2020 में फिर से इस पद पर आए, लेकिन दो साल बाद देवेश चंद्र ठाकुर के पद संभालने पर हट गए, जब JD(U) अचानक NDA से अलग हो गई थी। NDA सूत्रों के अनुसार, बीजेपी और JD(U) के बीच एक “समझौता” हुआ है कि दोनों पार्टियों में से किसी एक के नेता को एक-एक सदन का प्रमुख बनाया जाएगा।

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