नई दिल्ली। दिल्ली सरकार प्रस्तावित इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी 2.0 के तहत महिलाओं को EV टू-व्हीलर खरीदने पर 36,000 रुपये तक की रियायत दे सकती है। नई पॉलिसी के अनुसार यह लाभ उन पहली 10,000 महिलाओं को मिल सकता है जिनके पास ड्राइविंग लाइसेंस हैं। इस पॉलिसी पर फिलहाल दिल्ली सरकार विचार कर रही है। इसे जल्द ही मंजूरी मिल सकती है। खास बात यह है कि पॉलिसी में 15 अगस्त 2026 से पेट्रोल, डीजल, सीएनजी से चलने वाले टू-व्हीलर वाहनों पर रोक लागने की सिफारिश की गई है।
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पॉलिसी में जिक्र है कि इलेक्ट्रिक वाहन खरीदारों में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए सरकार ऐसा कदम उठा सकती है। सरकार महिलाओं को बैटरी की क्षमता के हिसाब से प्रति किलोवाट-घंटे (केडब्ल्यूएच) के लिए 12,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दे सकती है, जो इलेक्ट्रिक 2-व्हीलर के मामले में करीब 36,000 रुपये तक हो सकती है।
2030 तक लागू की जा सकती है पॉलिसी
केंद्र की पीएम ई-ड्राइव योजना के पूरक के रूप में तैयार की गई ईवी नीति 2.0 (EV Policy 2.0) का उद्देश्य दिल्ली भर में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या को बढ़ाना है। यह योजना शुरुआत में 31 मार्च 2030 तक लागू की जा सकती है। इसमें न केवल इलेक्ट्रिक 2-व्हीलर वाहनों, बल्कि आगे तिपहिया और कमर्शियल वाहनों को भी धीरे-धीरे शामिल किया जा सकता है।
सीएनजी ऑटोरिक्शा को हटाने की सिफारिश
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इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति 2.0 में सीएनजी से चलने वाले ऑटोरिक्शा को चरणबद्ध तरीके से हटाने की सिफारिश भी की गई है। जिसकी घोषणा दिल्ली सरकार जल्द ही कर सकती है। संभावना है कि इस साल 15 अगस्त से किसी भी नए सीएनजी ऑटोरिक्शा के रजिस्ट्रेशन की इजाजत नहीं मिलेगी। इस साल 15 अगस्त से सीएनजी ऑटो परमिट रिन्यू नहीं किए जाएंगे और ऐसे सभी परमिटों को केवल ई-ऑटो परमिट से बदला जा सकता है।
क्या बंद होंगे पेट्रोल 2-व्हीलर?
मसौदा नीति में एक बड़ी सिफारिश में यह भी कहा गया है कि 15 अगस्त 2026 से पेट्रोल, डीजल, सीएनजी से चलने वाले 2-व्हीलर वाहनों को इजाजत नहीं दी जाएगी। इसी प्रकार समिति ने सिफारिश की है कि 15 अगस्त 2025 से डीजल, पेट्रोल, सीएनजी से चलने वाले माल वाहक तिपहिया वाहनों भी रजिस्ट्रेशन नहीं किए जाएंगे।
15 दिन के लिए बढ़ाई थी पुरानी पॉलिसी
दिल्ली सरकार ने अपनी वर्तमान इलेक्ट्रिक वाहन (EV) पॉलिसी को 31 मार्च को समाप्त होने के बाद इसे 15 दिनों के लिए बढ़ा दिया है। दिल्ली मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद अधिसूचना जारी की जा सकती है। इसका प्रमुख उद्देश्य जीवाश्म ईंधन से चलने वाले वाहनों को तेजी से हटाकर दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति में सुधार करना है।