Sawan 2024 : भगवान भोलेनाथ का सबसे प्रिय महीना सावन माना जाता है। सावन का मौसम सभी को भाता है, झुलसा देने वाली गर्मी और उमस के बाद सावन की ठंडी बयार सबको भली लगती है। कभी रिमझिम हल्की फुहार कभी घनघोर घटाओं का खूब बरसना, सारी प्रकृति धुल कर निखरी सी लगती है। इस मौसम में पशु, पक्षी और मानव सभी खुश होकर चहकने लगते है।
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वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल सावन के महीने में कई अद्भुत संयोग बन रहे है।जहां इस बार सावन की शुरुआत सोमवार से हो रही है, वहीं इसका समापन भी सोमवार को ही होगा। पंचांग के मुताबिक, इस बार सावन 22 जुलाई से 19 अगस्त तक है। इस बार सावन में 5 सोमवार होंगे. इस साल सावन का महीना 29 दिन का है। इस बीच 6 दुर्लभ संयोग बनेंगे। ऐसे में इस बार का सावन चार राशियों के लिए खास माना जा रहा है क्योंकि इन राशियों से जुड़े लोगों को शिवजी की असीम कृपा प्राप्त होने वाली है। आइए जानते हैं कि इस बार सावन में बनने वाले खास संयोग के बारे में।
सावन में बनेंगे ये 6 खास संयोग
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, इस बार सावन में चंद्रमा और मंगल की युति से नवपंचम योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, शश राजयोग, प्रीति योग और आयुष्मान योग बनने वाला है।
सावन के पहले सोमवार पर बन रहा प्रीति योग
सावन के पहले सोमवार पर प्रीति योग बन रहा है और इस योग के स्वामी स्वयं भगवान नारायण हैं। पुराणों में बताया गया है कि प्रीति योग सदा मंगल करने वाला और भाग्य को बढ़ाने वाला होता है इसलिए प्रीति योग को मंगल दायक योग भी कहते हैं।
श्रावण व्रत
श्रावण मास के दौरान, भक्त आमतौर पर चार प्रकार के उपवास रखते हैं, जिनमें सावन सोमवार व्रत, सोलह सोमवार व्रत, प्रदोष व्रत और मंगला गौरी व्रत शामिल हैं।
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सावन सोमवार व्रत: यह व्रत महीने के प्रत्येक सोमवार को मनाया जाता है, आमतौर पर यह चार सोमवार तक चलता है, कभी-कभी पांच भी हो सकते हैं।
सोलह सोमवार व्रत: आदर्श पति की प्राप्ति के लिए युवतियां महीने के पहले सोमवार से शुरू करके लगातार 16 सोमवार तक यह व्रत रखती हैं।
प्रदोष व्रत: कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष दोनों के 13वें दिन (त्रयोदशी तिथि) को मनाया जाता है, भक्त इस दिन को प्रदोष काल के दौरान कठोर उपवास और पूजा के साथ भगवान शिव की पूजा के लिए शुभ मानते हैं।
मंगला गौरी व्रत: श्रावण मास के दौरान मंगलवार को मनाया जाने वाला यह व्रत सुखी वैवाहिक जीवन और जीवनसाथी की भलाई और दीर्घायु के लिए किया जाता है।
शनि व्रत: श्रावण मास के दौरान शनिवार को, भक्त मुख्य रूप से भगवान शनि को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए शनि व्रत रखते हैं।