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Sawan Som Pradosh Vrat 2026 : सावन के दूसरे सोमवार पर प्रदोष व्रत का संयोग, श्री शिव प्रदोष स्तोत्र जप करने से ऋण और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है

By अनूप कुमार 
Updated Date

Sawan Som Pradosh Vrat 2026 :  सावन में शिव कृपा पाने के लिए शिव भक्त भोलेनाथ को जलाभिषेक करते हैं और प्रदोष ब्रत के नियम का पालन करते है। प्रदोष’ शब्द का अर्थ है— दोषों या पापों का क्षय होना।
सावन का पहला प्रदोष व्रत 10 अगस्त को रखा गया है। इस दिन सावन का दूसरा सोमवार भी है। पौराणिक ग्रथों में वर्णित है कि इस व्रत से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है और विभिन्न ग्रहों के दोष शांत होते हैं।
इसी प्रका व्रत का नियम से पालन करने पर दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है।

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प्रदोष काल में शिव पूजा
सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक का समय प्रदोष काल कहलाता है। इसी दौरान शिव जी की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए।

मान्यता है कि इस बेला में भगवान शिव कैलाश पर प्रसन्न मुद्रा में होते हैं।

प्रदोष काल के लिए विशेष शिवमंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि, तन्नो रुद्र प्रचोदयात्

श्री शिव प्रदोष स्तोत्र – जो भगवान शिव को समर्पित है। इस स्तोत्र के नियमित पाठ से सभी प्रकार के दुख, दरिद्रता, रोग, ऋण और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है। प्रदोष काल में शिव पूजा का विशेष महत्व है, और यह स्तोत्र उसी पूजा का मुख्य अंग है।

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श्री शिव प्रदोष स्तोत्र
॥ श्री गणेशाय नमः ॥
॥ ॐ श्री गुरुवे नमः ॥
॥ ॐ कुलदेवतायै नमः ॥
॥ ॐ नमः शिवाय ॥
जय सर्वगुणातीत जय सर्ववरप्रद।
जय नित्यनिराधार जय विश्वम्भराव्यय ॥२॥
जय विश्वैकवन्द्येश जय नागेन्द्रभूषण।
जय गौरीपते शम्भो जय चन्द्रार्धशेखर ॥३॥
जय देव जगन्नाथ जय शङ्कर शाश्वत।
जय सर्वसुराध्यक्ष जय सर्वसुरार्चित ॥१॥
जय कोट्यर्कसङ्काश जयानन्तगुणाश्रय।
जय भद्र विरुपाक्ष जयाचिन्त्य निरञ्जन ॥४॥
जय नाथ कृपासिन्धो जय भक्तार्तिभञ्जन।
जय दुस्तरसंसारसागरोत्तारण प्रभो ॥५॥
प्रसीद मे महादेव संसारार्तस्य खिद्यतः।
सर्वपापक्षयं कृत्वा रक्ष मां परमेश्वर ॥६॥
महादारिद्रयमग्नस्य महापापहतस्य च।
महाशोकनिविष्टस्य महारोगातुरस्य च ॥७॥
ऋणभारपरीतस्य दह्यमानस्य कर्मभिः।
ग्रहैः प्रपीड्यमानस्य प्रसीद मम शङ्कर ॥८॥

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