Sawan month Ghevar dessert : सावन में भगवान शिव की कृपा बरसती है। इस माह में शिव भक्त उल्लास से लबालब भर रहते है। सावन के महीने में रिमझिम बारिश होती है। इस समय मौसम सुहावना होता है। सावन के महीने में घेवर मिठाई खाने परंपरा है। राजस्थान,हरियाणा, दिल्ली,गुजरात ,मध्य प्रदेश, पश्चिम उत्तर प्रदेश में हर घर में घेवर खाया जाता है। प्रचलित व्रत तीज पर घेवर खाने परंपरा है। सावन में मेहमानों की खूब आवभगत लिए घेवर मिठाई खिलाने की परंपरा है।
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आयुर्वेद के अनुसार, बरसात के मौसम में वात और पित्त प्रबल होते हैं और सूखापन और अम्लता का कारण बनते हैं। माना जाता है कि घी और मीठे सिरप के इस्तेमाल के कारण घेवर मिठाई में शांतिदायक गुण होते हैं। सांस्कृतिक महत्व की बात करें तो मानसून के दौरान घेवर खाना और बाँटना शुभ माना जाता है।
चाशनी वाले घेवर को फ्रिज में रखकर 10-12 दिन तक खाया जा सकता है और मलाई वाले घेवर को 3-4 दिन तक खाया जा सकता है। 4-5 घेवर बनाने के बाद उसका रंग बदलने लगता है। केसरिया घेवर देसी घी और चीनी मिलाकर तैयार किया जाता है। केसरिया घेवर कई दिनों तक खराब नहीं होता। इसके अलावा एक मलाई घेवर बनाया जाता है जिसमें खोए का प्रयोग किया जाता है। इन घेवरों में कई तरह के मेवा आदि का प्रयोग भी होता है।
कुछ विशेषज्ञों की मानें तो घेवर में बहुत सारा घी डाला जाता है और यही वजह है कि इसे व्रत के तुरंत बाद खाया जाता है। घी शरीर को सही मात्रा में गर्मी और ऊर्जा प्रदान करता है। तीज पर घेवर खाने को आयुर्वेदिक प्रथाओं वात और पित्त से जोड़ा जाता है।