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शंकराचार्य ने योगी सरकार को दिया 40 दिन का अल्टीमेटम, गाय को राज्यमाता का दर्जा दें, वरना 10-11 मार्च को लखनऊ में होगा संत महासमागम

By santosh singh 
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वाराणसी। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज (Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati Maharaj) ने शुक्रवार को कहा कि योगी सरकार (Yogi Government) को गोमाता की रक्षा के लिए अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए 40 दिनों का समय दिया जा रहा है। यदि इस अवधि में गोमाता को ‘राज्यमाता’ का दर्जा नहीं दिया गया और गोवंश निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया, तो परिणाम गंभीर होंगे। शंकराचार्य ने कहा कि जो सरकार गोवंश की रक्षा नहीं कर सकती, उसे हिंदू कहलाने का कोई अधिकार नहीं है। विशेष रूप से उस योगी को तो बिल्कुल नहीं, जो गुरु गोरक्षनाथ की पवित्र गद्दी का महंत होने का दावा करता है।

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उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) से कहा कि हमसे आपने हमारा प्रमाण-पत्र मांग लिया था, हमने सहज भाव से दे दिया, क्योंकि सत्य को प्रमाण से भय नहीं होता। अब समय आपके ‘हिंदू’ होने का प्रमाण देने का है। सनातनी समाज अब आपसे आपके हिंदू होने का साक्ष्य माँगता है। हिंदू होना केवल भाषणों या भगवा वस्त्र तक सीमित नहीं है, इसकी कसौटी गो-सेवा और धर्म-रक्षा है।

शंकराचार्य ने दो स्पष्ट शर्तें रखीं

गोमाता को ‘राज्यमाता’ का आधिकारिक दर्जा दिया जाए, जैसा महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में देशी गायों के लिए किया है और नेपाल में गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा प्राप्त है। इसके अलावा गोवंश निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का शासनादेश जारी किया जाए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 40 दिनों में ये माँगें पूरी नहीं हुईं, तो 10-11 मार्च को लखनऊ की पावन धरा पर संपूर्ण संत समाज का समागम होगा। उसमें सरकार को ‘नकली हिंदू’ और ‘छद्म हिंदू’ घोषित किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ‘कालनेमी’ भी घोषित किया जाएगा। शंकराचार्य ने आगे कहा कि स्वतंत्र भारत में गोमाता की रक्षा और गोहत्या बंदी की मांग करना ही सबसे बड़ा अपराध बन गया है। जब-जब इस मुद्दे पर आवाज उठी, सरकारों ने उसे क्रूरता से कुचल दिया।

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उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी छवि को धूमिल करने के प्रयास हो रहे हैं और योगी आदित्यनाथ अपने विश्वस्तों (जैसे रामभद्राचार्य) के माध्यम से इसका नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “उत्तराखंड ने ‘राष्ट्रमाता’ का प्रस्ताव दिया, महाराष्ट्र ने ‘राज्यमाता’ बनाया, तो भगवान राम और कृष्ण की धरती उत्तर प्रदेश मांस निर्यात का केंद्र क्यों बना हुआ है? यह केवल पद की लड़ाई नहीं, बल्कि सनातन की आत्मा की रक्षा का प्रश्न है।

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