Shardiya Navratri 2026 Mahasaptami : क्या आप जानते हैं कि नवरात्रि की महासप्तमी को देवी दुर्गा ने अपने सबसे भयानक, लेकिन सबसे दयालु रूप—मां कालरात्रि को क्यों प्रकट किया था? एक ऐसा रूप जो काल यानी समय और मृत्यु को भी वश में कर लेता है! आइए जानते हैं इस पावन दिन का वह पौराणिक रहस्य जो आपके जीवन के हर डर को खत्म कर सकता है।
पढ़ें :- Hanuman Jayanti 2026 : हनुमान जयंती 2026 पर आज करें बजरंगबली की पूजा, जानें भोग और विधि-विधान
संसार को अधर्म
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब रक्तबीज नाम के महाभयानक असुर ने चारों ओर तबाही मचा रखी थी, तब उसका वध करने के लिए मां दुर्गा ने अपने तेज से इस रौद्र रूप को उत्पन्न किया। मां कालरात्रि का रंग रात के घने अंधकार जैसा काला है, बाल बिखरे हुए हैं और उनके गले में बिजली की तरह चमकने वाली माला है। उनके तीन नेत्र ब्रह्मांड की तरह गोल हैं, जिनसे अग्नि की किरणें निकलती हैं। जब रक्तबीज की एक-एक बूंद जमीन पर गिरकर नए राक्षस बना रही थी, तब मां कालरात्रि ने उसका सारा रक्त पीकर संसार को अधर्म से बचाया।
शत्रुओं का कोई भय नहीं रहता
भले ही मां का यह रूप देखने में अत्यंत भयानक है, लेकिन इनका एक नाम ‘शुभंकरी’ भी है। इसका अर्थ है कि मां अपने भक्तों को हमेशा शुभ फल देती हैं। महासप्तमी की रात को जो भी भक्त सच्चे मन से मां की पूजा करता है, उसे भूत-प्रेत, अग्नि, जल या शत्रुओं का कोई भय नहीं रहता। यह दिन हमें सिखाता है कि चाहे हमारे जीवन में कितना भी बड़ा अंधकार या संकट क्यों न हो, साहस और धर्म के बल पर जीत हमेशा उजाले की ही होती है।
असीम मानसिक शक्ति प्राप्त होती है
महासप्तमी की रात को ‘तांत्रिक साधना’ के लिए भी सबसे शक्तिशाली माना जाता है। इस दिन मां कालरात्रि को प्रसन्न करने के लिए गुड़ का भोग लगाया जाता है। माता को लाल या नीले रंग के फूल बहुत प्रिय हैं। माना जाता है कि इस रात साधना करने वाले भक्तों के चक्र जाग्रत होते हैं और उन्हें असीम मानसिक शक्ति प्राप्त होती है।