नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। छात्र लगातार केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं। अस्पताल में मौजूद सोनम वांगचुक ने बुधवार को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ जितेंद्र सिंह को पत्र लिखा है। इसमें सोमन वांगचुक ने कहा कि, अगर सरकार आश्वासन देती है कि आंदोलन में शामिल किसी भी युवा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं होगी तो वो अपना अनशन समाप्त कर देंगे। ऐसा नहीं होने पर वो अपना आनशन जारी रखेंगे।
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सोनम वांगचुक ने अपने पत्र में लिखा, कल रात अस्पताल में मुझसे मिलने आने और मेरा अनशन खत्म करने की आपक अपील के लिए धन्यवाद। हमारी बातचीत के दौरान, आपने मुझे भरोसा दिलाया कि सरकार इन बातों पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी। उन्होंने कहा, परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवज़ा दिया जाए। जवाबदेही तय करने के लिए संसद में सार्थक चर्चा हो, जिसमें माननीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े पर विचार करना भी शामिल हो।
इसके साथ ही लिखा, 20 जुलाई 2026 को हुआ ‘चलो संसद’ मार्च बहुत शांतिपूर्ण रहा, जबकि पुलिस ने ज़रूरत से ज़्यादा बल का इस्तेमाल किया। पूरे देश और दुनिया ने लोकतांत्रिक विरोध के प्रति उनके धैर्य और संकल्प को देखा। मुझे पूरी उम्मीद है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में इस भरोसे को किसी भी कानूनी मामले, उत्पीड़न या इसमें शामिल लोगों के खिलाफ बदले की भावना से की गई कार्रवाई से और कमज़ोर नहीं किया जाएगा।
AN APPEAL TO THE GOVERNMENT
regarding breaking my fast…
Once the assurance from govt come I will also appeal to the peacefully protesting students to halt the movement for now and enter into dialogue with the government pic.twitter.com/gR6S8woF5R— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 22, 2026
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आपके दौरे के बाद, अलग-अलग पार्टियों के लगभग 65 सांसदों ने मुझे पत्र लिखा है; कुछ लोग आ भी चुके हैं और बाकी लोगों के आज शाम तक आने की उम्मीद है। उन सभी ने मुझसे अपना अनशन खत्म करने का आग्रह किया है और मुझे याद दिलाया है कि देश की सेवा में मुझे अभी बहुत काम करना है। मैं उनकी बात से सहमत हूं। मैं जीना चाहता हूं। मैं अपने छात्रों, शिक्षा और उस काम पर लौटना चाहता हूं जिसने मेरी ज़िंदगी को एक पहचान दी है। लेकिन मैं उन युवा लोगों की कीमत पर ऐसा नहीं कर सकता, जिनके लिए यह आंदोलन शुरू हुआ था।
इसलिए, मैं सरकार से सम्मानपूर्वक यह साफ़ आश्वासन चाहता हूं कि इस आंदोलन में शामिल होने वाले किसी भी युवा प्रदर्शनकारी के ख़िलाफ़ कोई दंडात्मक या बदले की भावना वाली कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। उनका एकमात्र “अपराध” एक निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा प्रणाली के लिए आवाज़ उठाना रहा है।
अगर ऐसा आश्वासन दिया जाता है, तो मैं इस भरोसे के साथ अपना अनशन समाप्त करूंगा कि सरकार ने न केवल मेरी अपील सुनी है, बल्कि लाखों युवा भारतीयों की आकांक्षाओं को भी समझा है। ऐसे आश्वासन के अभाव में, मुझे अनिश्चित काल तक अपना अनशन जारी रखने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। मुझे यह भी उम्मीद है कि आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस बल का अत्यधिक इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। हमारे लोकतंत्र का भविष्य इस बात पर निर्भर नहीं करता कि वह उनसे कैसा व्यवहार करता है जो उससे सहमत हैं, बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि वह अपने युवा नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है जब वे साहस, उम्मीद और दृढ़ विश्वास के साथ बोलने का साहस करते हैं।
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