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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, ईसाई या इस्लाम अपनाने पर नहीं मिलेगा अनुसूचित जाति का लाभ

By santosh singh 
Updated Date

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने धर्मांतरण के मामले में मंगलवार को एक बेहद अहम फैसला सुनाया है, जो अनुसूचित जाति के दर्जे से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट (Andhra Pradesh High Court) के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसके तहत यदि कोई व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म (जैसे ईसाई या इस्लाम) में धर्मांतरण करता है, तो वह अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा खो देता है।

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फैसले की मुख्य बातें

अदालत ने स्पष्ट किया कि ईसाई धर्म अपनाने के बाद कोई भी व्यक्ति SC समुदाय का सदस्य नहीं रह सकता और न ही वह SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Prevention of Atrocities Act) के तहत सुरक्षा की मांग कर सकता है।

जानें क्या था मामला?

यह आदेश एक ऐसे व्यक्ति के संदर्भ में आया, जिसने ईसाई धर्म अपनाकर पादरी के रूप में काम किया, लेकिन बाद में अपने साथ हुए हमले को लेकर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराया था। अभियुक्तों ने इस पर आपत्ति जताई थी। न्यायालय ने पहले के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा है कि केवल आरक्षण का लाभ पाने के लिए, बिना सच्ची आस्था के धर्म परिवर्तन करना संविधान के साथ धोखाधड़ी है।

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2026 में धर्मांतरण पर अन्य प्रमुख घटनाक्रम

महाराष्ट्र का नया एंटी-कनवर्ज़न कानून: मार्च 2026 में, महाराष्ट्र विधानसभा ने “महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026” (Maharashtra Freedom of Religion Bill, 2026) पारित किया है। यह जबरन धर्मांतरण, धोखे या लालच के आधार पर होने वाले धर्म परिवर्तन को रोकता है। अवैध धर्मांतरण के लिए 7 साल की जेल और 1 लाख रुपये का जुर्माना। महिलाएं/बच्चे/SC-ST: यदि पीड़ित महिला, नाबालिग, या SC/ST है, तो 7 साल की जेल और 5 लाख रुपये जुर्माना। सामूहिक धर्मांतरण के लिए 10 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये जुर्माना। यदि शादी का एकमात्र उद्देश्य धर्मांतरण है, तो ऐसा विवाह अवैध घोषित किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

अदालत ने कहा है कि जबरन धर्मांतरण देश की सुरक्षा और धर्म की स्वतंत्रता के लिए खतरनाक है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सहित कई राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानूनों (Anti-conversion laws) की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

रिपोर्ट: सुशील कुमार साह

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