सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार को दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह (Late former Prime Minister Dr. Manmohan Singh) के खिलाफ चल रहे कोयला ब्लॉक आवंटन मामले (Coal Block Allocation Case) को पूरी तरह बंद कर दिया। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने उन्हें और अन्य आरोपियों को तलब करने वाले स्पेशल कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही सीबीआई (CBI) की उस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया गया, जिसमें डॉ. सिंह को क्लीन चिट दी गई थी।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार को दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह (Late former Prime Minister Dr. Manmohan Singh) के खिलाफ चल रहे कोयला ब्लॉक आवंटन मामले (Coal Block Allocation Case) को पूरी तरह बंद कर दिया। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने उन्हें और अन्य आरोपियों को तलब करने वाले स्पेशल कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही सीबीआई (CBI) की उस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया गया, जिसमें डॉ. सिंह को क्लीन चिट दी गई थी।
ट्रायल कोर्ट का आदेश खारिज
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। पीठ ने सीबीआई (CBI) की ओर से दाखिल दोनों क्लोजर रिपोर्ट को सही माना। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के पास सीबीआई (CBI) की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और डॉ. मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh) को समन भेजने का कोई ठोस आधार नहीं था। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने स्पष्ट कहा कि मामले की पड़ताल करने के बाद यह साफ हो गया है कि सीबीआई (CBI) की रिपोर्ट प्रक्रिया के तहत बिल्कुल सही थी। इसलिए इस मुकदमे को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं बनता।
2005 के तालाबीरा-II ब्लॉक से जुड़ा मामला
यह पूरा मामला 2005 में ओडिशा के तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक के आवंटन का है। उस समय डॉक्टर मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh) के पास ही कोयला मंत्रालय का प्रभार था। सीबीआई (CBI) ने जांच के बाद मामले में कोई आपराधिक साजिश नहीं पाई थी और क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। हालांकि, स्पेशल कोर्ट ने सीबीआई (CBI) की रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। स्पेशल कोर्ट ने मार्च 2015 में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारख समेत तीन अन्य को आरोपी के रूप में तलब किया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इस आदेश पर रोक लगा दी थी।
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का पक्ष
डॉक्टर मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh) ने शुरू से ही अपने फैसले में किसी भी तरह की आपराधिक नीयत से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि आवंटन का निर्णय पूरी तरह प्रशासनिक और तय नीति के तहत लिया गया था। उन्होंने लोक सेवकों पर मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक कानूनी अनुमति (संस्वीकृति) के न होने पर भी सवाल उठाया था। अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के इस अंतिम फैसले से इस पूरे विवाद पर हमेशा के लिए विराम लग गया है।