नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल यानी 131वें संविधान संशोधन विधेयक पर दो दिनों तक लगातार चली चर्चा के बाद शुक्रवार, 17 अप्रैल को शाम हुई वोटिंग में ये बिल गिर गया है। ये संविधान संशोधन बिल पारित नहीं हो सका। कुल 298 सांसदों ने इस बिल के पक्ष में मतदान किया है, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। मतदान में कुल 528 सांसदों ने हिस्सा लिया। सांसदों के इस संख्या के हिसाब से बिल का पारित होने के लिए 360 वोटों की दरकार थी, जो नहीं मिल सका।
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नंबरों का आंकड़ा पूरा ना होने की वजह से ये बिल लोकसभा में ही गिर गया। साथ ही इस बिल के साथ सरकार जो दो अन्य बिल लोकसभा में लेकर आई थी उसे वापस ले लिया। साथ ही लोकसभा शनिवार सुबह 11 बजे के लिए स्थगित कर दिया गया है।
गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर परिसीमन लटकाए रखने का आरोप लगाया और कहा कि 50 साल से जनता को आबादी के अनुपात में अपना प्रतिनिधि नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि ये महिला आरक्षण बिल का विरोध कर रहे हैं। चुनाव में इनको माताओं-बहनों के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा, रास्ता नहीं मिलेगा।
इस बिल पर चर्चा के दौरान शुक्रवार को भी पक्ष और विपक्ष में जमकर तकरार हुई। जोरदार हंगामा हुआ। महिला आरक्षण बिल से जुड़े संशोधनों पर सरकार सत्ताधारी गठबंधन में शामिल पार्टियों के अपने तर्क थे। वहीं, विपक्ष ने सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। अखिलेश यादव ने तो यहां तक कह दिया कि बीजेपी यह लिखकर दे दे कि अगला प्रधानमंत्री महिला को बनाएंगे, तब भी हम भरोसा नहीं करेंगे।