संभल। 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद सर्वे के दौरान उत्तर प्रदेश के संभल में भड़की हिंसा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला सच सामने आया है। इस पूरे फसाद के पीछे इलाके में अपना राजनीतिक और आपराधिक दबदबा कायम करने की एक खूनी साजिश की गई थी। हाल ही में विधानसभा में पेश हुई न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट और पुलिस की छानबीन से साफ हो गया है कि इस हिंसा में भीड़ को ढाल बनाकर सुरक्षाबलों पर जर्मनी, अमेरिका और पाकिस्तान में बनी विदेशी हथियारों से गोलियां बरसाई गई थीं।
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दुबई से रची गई खूनी साजिश
खुफिया एजेंसियों की जांच के मुताबिक, इस साजिश का मुख्य सूत्रधार दीपा सराय निवासी शारिक उर्फ ‘शारिक साठा’ है। शारिक ने इलाके में अपना एकतरफा वर्चस्व और खौफ कायम करने के लिए इस खूनी खेल का षडयंत्र रचा था। घटना के वक्त वह खुद दुबई में बैठकर अपने गुटों— मुल्ला अफरोज, गुलाम और वसीम के जरिए ग्राउंड जीरो पर हिंसा को ऑपरेट कर रहा था। पुलिस अब शारिक साठा के खिलाफ लुकआउट और इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की कानूनी प्रक्रिया में जुट गई है।
नालियों से मिले विदेशी कारतूस और हथियारों के खोखे
जांच टीम ने घटनास्थल के पास की नालियों, छतों और गलियों से भारी मात्रा में कारतूस और खोखे बरामद किए हैं। बैलिस्टिक की एक रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई है कि ये खोखे जर्मनी, अमेरिका और पाकिस्तान से तस्करी कर लाए गए अत्याधुनिक विदेशी हथियारों के हैं। शारिक साठा ने अपने शूटरों और उपद्रवियों को ये हथियार पहले से ही दे रखे थे, ताकि पुलिस को भारी नुकसान पहुंचाया जा सके।
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अचानक नहीं भड़की हिंसा, व्हाट्सएप पर तैयार हुई थी ‘भीड़’
न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, 24 नवंबर को हुई यह हिंसा हफ्तों की प्लानिंग थी। साथ ही इस इलाके में तुर्क और पठान बिरादरी के बीच वर्चस्व की जंग और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को भुनाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया गया। इसके अलावा व्हाट्सएप ग्रुप्स और लाउडस्पीकरों के जरिए “मस्जिद खतरे में है” जैसी अफवाहें फैलाकर सोची-समझी रणनीति के तहत हजारों की हिंसक भीड़ जुटाई गई थी। उपद्रवियों को पहले से ही छतों और गलियों के मोड़ों पर तैनात किया गया था।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस सुनियोजित हिंसा और अंधाधुंध फायरिंग में चार स्थानीय युवकों की मौत हो गई थी, जबकि पुलिस अधिकारियों समेत करीब 30 सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। जांच आयोग ने साफ कर दिया है कि मरने वाले चारों युवकों की जान पुलिस की आत्मरक्षा की कार्रवाई में नहीं, बल्कि उपद्रवियों की तरफ से चलाई जा रही गैरकानूनी विदेशी बंदूकों की अंधाधुंध क्रॉस-फायरिंग की चपेट में आने से हुई थी।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई जारी
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के खुलासे और विदेशी हथियारों की बरामदगी के बाद उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है। पुलिस ने फरार आरोपियों की संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके साथ ही मुख्य साजिशकर्ताओं पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून और गैंगस्टर एक्ट के तहत कड़ा कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है।