नई दिल्ली। राजस्थान से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद नीरज डांगी (Neeraj Dangi) ने राज्यसभा में सरकार से पूछा कि देश में सोना और चांदी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे खासकर ग्रामीण इलाकों में परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भारी असर पड़ रहा है। पिछले 13 महीनों में चांदी की कीमतों में 306 फीसदी और सोने की कीमतों में 111 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। इस तेजी ने न सिर्फ आम लोगों की बचत को प्रभावित किया है, बल्कि महिलाओं और विवाह योग्य लड़कियों वाले परिवारों के लिए यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
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देश में सोने और चांदी की कीमतें बेकाबू हो चुकी हैं। ग्रामीण भारत – विशेष रूप से महिलाओं और विवाह योग्य परिवारों की कमर टूट चुकी है।
पिछले 13 महीनों में चांदी की कीमतों में 306% और सोने की कीमतों में 111% की वृद्धि देखने को मिली है।
जिस देश में सोना-चांदी नारी की सुरक्षा,… pic.twitter.com/FyGmJvWhXM
— Congress (@INCIndia) January 29, 2026
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सांसद ने कहा कि ग्रामीण भारत में सोना और चांदी सिर्फ आभूषण नहीं हैं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, आत्मसम्मान और पारिवारिक भविष्य से जुड़े अहम प्रतीक माने जाते हैं। लेकिन इनकी बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों की कमर तोड़ दी है। छोटे किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग के परिवार अब अपनी बेटियों के लिए न्यूनतम आभूषण भी नहीं खरीद पा रहे हैं। इस वजह से विवाह योग्य लड़कियों वाले परिवार आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।
जिस देश में सोना-चांदी नारी की सुरक्षा, आत्मसम्मान और पारिवारिक भविष्य से जुड़ा हो, वहां इन कीमतों को बेलगाम छोड़ देना सरकार की गंभीर विफल आर्थिक नीति को दर्शाता है। आज किसान, श्रमिक, निम्न और मध्यम वर्ग के लोग अपनी बेटियों के विवाह के लिए न्यूनतम आभूषण तक नहीं खरीद पा रहे हैं। दूर्भाग्यपूर्ण है कि एक तरफ- सरकार महिला सशक्तिकरण की बात करती हैं। दूसरी तरफ- भारी GST, उच्च आयात शुल्क, जमाखोरों पर लगाम ना लगाकर महिलाओं की बचत को मूल्यहीन बना रही है। यह कहना अतिशियोक्ति नहीं होगा कि महिलाओं को सजा मिल रही है और सरकार सिर्फ जमाखोरों को संरक्षण दे रही है। इतना ही नहीं- बढ़ती कीमतों के कारण छोटे सुनार और कारोबारी भी रोजगार के संकट से जूझ रहे हैं। मेरी मांग है कि सरकार देशहित में सोने और चांदी की कीमतों पर हस्तक्षेप करे, GST की कटौती करें और कठोर कदम उठाए।
सरकार की नीतियों पर सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति के पीछे सरकार की नीतियां भी जिम्मेदार हैं। सोने और चांदी पर उच्च GST और आयात शुल्क, और जमाखोरों पर कड़ी कार्रवाई ना करना, आम लोगों की बचत को प्रभावित कर रहा है। दूसरी ओर, सरकार महिला सशक्तिकरण की बात करती है, लेकिन आर्थिक अस्थिरता के कारण महिला और परिवारों की बचत का मूल्य कम होता जा रहा है।
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छोटे कारोबारी और सुनार भी परेशान
उनका कहना है कि बढ़ती कीमतों से केवल आम लोग ही नहीं, बल्कि छोटे सुनार और आभूषण व्यवसायी भी प्रभावित हो रहे हैं। उनकी बिक्री घट रही है, जिससे रोजगार पर संकट गहरा रहा है। छोटे व्यवसायियों का कहना है कि अगर सरकार समय पर हस्तक्षेप नहीं करती है, तो इससे पूरे आभूषण उद्योग और उससे जुड़े कई रोजगारों पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
हस्तक्षेप करे सरकार
विशेषज्ञ और सामाजिक संगठनों की मांग है कि सरकार सोने और चांदी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए तुरंत कदम उठाए। इसके लिए GST में कटौती, आयात शुल्क में संशोधन और जमाखोरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जरूरी है। उनका कहना है कि यह सिर्फ आर्थिक कदम नहीं, बल्कि महिलाओं और परिवारों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा मामला भी है।
सोने और चांदी की बढ़ती कीमतें केवल आभूषणों की नहीं, बल्कि आम लोगों की जीवनशैली और सामाजिक संरचना को भी प्रभावित कर रही हैं। यदि सरकार तुरंत कदम नहीं उठाती है, तो ग्रामीण परिवारों की परेशानियां बढ़ती रहेंगी और छोटे कारोबारी उद्योग से बाहर होने पर मजबूर होंगे। इस समय नीति निर्माता यदि सही हस्तक्षेप करते हैं, तो महिलाओं और परिवारों की बचत और सम्मान को बचाया जा सकता है।