नई दिल्ली। पश्चिम विधानसभा बंगाल (West Bengal Legislative Assembly) में बीजेपी (BJP) की प्रचंड लहर के बाद भी कांग्रेस के दो विधायकों का चुनाव में जीत हासिल करना ऐतिहासिक है। बता दें कि कांग्रेस के दो उम्मीदवारों का बंगाल में जीतना बड़ी बात है, क्योंकि पिछली बार कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला था। इस बार भी चुनाव आयोग (Election Commission)ने पूरा बंदोबस्त किया था कि कांग्रेस पार्टी का खाता न खुले। बंगाल में कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल करने वाले ये दो विधायक मोताब शेख (Motab Sheikh) और जुल्फिकार अली (Zulfiqar Ali) हैं।
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मुर्शिदाबाद की फरक्का सीट (Farakka Seat) से कांग्रेस के टिकट पर मोताब शेख तो वह उम्मीदवार थे, जिनका नाम SIR में कट गया था और उनके विधानसभा चुनाव लड़ने पर ही सस्पेंस बढ़ गया था। इसके बाद उन्होंने नाम जुड़वाने की लड़ाई लड़ी।
मोताब शेख (Motab Sheikh) ने नाम जुड़वाने के लिए अपीलीय ट्रिब्यूनल में अर्जी दी थी। अपीलीय ट्रिब्यूनल का काम वोटर लिस्ट से हटाए गए लोगों की अर्जियां निपटाना था। ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद मोताब शेख (Motab Sheikh) का नाम दोबारा वोटर लिस्ट में जोड़ा गया और तब जाकर वह चुनाव लड़ पाए।
मोताब ने बीजेपी के सुनील चौधरी को हराया
फरक्का सीट पर कांग्रेस के मोताब शेख ने BJP के सुनील चौधरी को 8,193 वोटों से हराया। मोताब को कुल 63,050 वोट मिले, जबकि सुनील चौधरी 54,857 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे।
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पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के मोताब शेख (Motab Sheikh) की जीत खास रही। चुनाव से कुछ हफ्ते पहले उनका नाम वोटर लिस्ट से तकनीकी कारणों के चलते हटा दिया गया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया, जहां मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली बेंच ने नए बने अपीलेट ट्रिब्यूनल (Appellate Tribunal) को मामला देखने का निर्देश दिया। ट्रिब्यूनल ने पासपोर्ट समेत उनके दस्तावेज सही पाए और उन्हें वैध मतदाता घोषित कर दिया। करीब 27 लाख आवेदनों में उनका मामला सबसे पहले मंजूर हुआ। नाम बहाल होने के बाद शेख ने फरक्का सीट से चुनाव लड़ा और BJP के सुधीर चौधरी को 8 हजार से ज्यादा वोटों से हरा दिया।