लखनऊ। क्या आप जानते हैं? सावन आते ही जिसका हर सुहागिन स्त्रियों को बेसब्री से इंतज़ार रहता है। वो है हरियाली तीज (Hariyali Teej) चारों तरफ बिखरी हरियाली, पेड़ों पर पड़े झूले और लोकगीतों की गूंज… इस त्योहार की रौनक ही कुछ अलग होती है। यह त्योहार 15 अगस्त शनिवार को मनाया जाएगा।
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सावन के पावन महीने में चारों ओर बिखरी हरियाली और रिमझिम फुहारों के बीच हरियाली तीज (Hariyali Teej) का त्योहार देशभर में पूरे उल्लास और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। उत्तर और मध्य भारत के राज्यों, विशेषकर उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और बिहार में इस पर्व को लेकर महिलाओं और नवविवाहिताओं में ख़ास उत्साह देखने को मिल रहा है।
सोलह श्रृंगार और झूलों की धूम
हरियाली तीज (Hariyali Teej) के अवसर पर सुहागिन महिलाएं (Married Women) अपने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। सुबह से ही मंदिरों में दर्शन और पूजन के लिए महिलाओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। हरे रंग के वस्त्र, हाथों में रची मेहंदी और सोलह श्रृंगार इस उत्सव की प्रमुख पहचान हैं। गांवों और शहरों के पार्कों में पेड़ों पर झूले डाले गए हैं, जहां महिलाएं लोकगीत और सावन के कजरी गाते हुए झूला झूलने की परंपरा निभा रही हैं।
सिंधारे की परंपरा और व्यंजनों की मिठास
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इस पर्व पर मायके से बेटी के घर ‘सिंधारा’ भेजने की पुरानी परंपरा निभाई जा रही है, जिसमें श्रृंगार सामग्री, वस्त्र और विशेष मिठाइयां भेजी जाती हैं। तीज के मौके पर घरों और बाजारों में घेवर, मालपुआ और खीर जैसे पारंपरिक पकवानों की भारी मांग है। नवविवाहिताएं अपनी पहली तीज मनाने के लिए मायके पहुंची हैं।
भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की याद में मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार,माता सती ने महादेव से पुन: मिलन के लिए 107 जन्म लिए पर वह शिव को पा न सकी उनके 108 वे जन्म मे पर्वतराज हिमवान और मैनावती के घर पर्वती रूप मे जन्म लिया। माता पार्वती ने हजारो वर्षो तक कठिन तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने सावन शुक्ल तृतीया के दिन ही उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया था। मान्यता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान से शिव-पार्वती की पूजा करने से सुहागिनों को अखंड सौभाग्य और कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है।
प्रकृति और नवजीवन का प्रतीक
हरियाली तीज (Hariyali Teej) पर केवल हरे रंग के वस्त्र ही नहीं, बल्कि हरी चूड़ियां, हरी बिंदी, और मेहंदी लगाने का भी विशेष विधान है। मेहंदी की तासीर ठंडी होती है, जो सावन की उमस में शरीर को शीतलता देती है। यही कारण है कि सावन की तीज पर हरा रंग केवल एक फैशन या परंपरा नहीं, बल्कि धर्म, प्रकृति और स्वास्थ्य का एक अद्भुत संगम है।
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ज्योतिष शास्त्र और ग्रहों का प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र (Astrology) के अनुसार, हरे रंग का संबंध बुध ग्रह से माना जाता है। कारक होता है। सावन में हरा रंग धारण करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होता है, जिससे घर-परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहती है। सावन में और विशेष रूप से हरियाली तीज (Hariyali Teej) के मौके पर महिलाओं का हरे रंग के वस्त्र, चूड़ियां और श्रृंगार धारण करना एक पुरानी परंपरा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस मौसम और तीज में हरे रंग को ही प्राथमिकता क्यों दी जाती है? आइए जानते हैं इसके पीछे छिपे धार्मिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक कारणों के बारे में।सावन में बारिश के बाद चारों ओर हरियाली छा जाती है। हरा रंग प्रकृति के जीर्णोद्धार, ताजगी और खुशहाली का प्रतीक है। इसे पहनकर महिलाएं प्रकृति का आभार व्यक्त करती है। देश के प्रमुख शिवालयों और मंदिरों में विशेष सजावट की गई है और दिनभर भजन-कीर्तन का दौर जारी है।
रिपोर्ट: दीपांजली मिश्रा